मुरादाबाद। ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर ऑल इंडिया हड़ताल के दूसरे दिन भी मुरादाबाद जिले में सरकारी विभागों के कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर रहे। विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में सिविल लाइन आंबेडकर पार्क में एकत्र होकर धरना एवं प्रदर्शन किया। डीएम को ज्ञापन प्रेषित किया। कार्य बहिष्कार का असर सरकारी दफ्तरों में साफ झलका। कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही। जो कर्मचारी दफ्तर गए भी धूप सेकते नजर आए। इससे फरियादी परेशान घूमते रहे।
पुरानी पेंशन बहाली समेत 10 सूत्रीय मांगों के समर्थन में कर्मचारी महासंघ ने आठ और नौ जनवरी को कार्य बहिष्कार की घोषणा की थी। सैकड़ों कर्मचारी बुधवार दूसरे दिन भी अपनी-अपनी यूनियनों के नेतृत्व में आंबेडकर पार्क पहुंचे। हाथों में बैनर और पोस्टर लिए नारेबाजी करते हुए जुलूस सुबह 11 बजे से एकत्र होने शुरू हो गए। आंबेडकर पार्क में सभी यूनियनों के जुलूस उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में धरना एवं प्रदर्शन में शामिल हो गए।
महासंघ जिलाध्यक्ष विपिन कुमार रस्तौगी और जिलामंत्री मुनीश ठाकुर ने मोदी सरकार को ललकारते हुए कर्मचारियों की उपेक्षा का खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की वादाखिलाफी से कर्मचारियों में आक्रोश है। कर्मचारियों से किए वादों को पूरा करने के बजाए उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है। कर्मचारी इसको लेकर रहेंगे। मिनिस्टीरियल फेडरेशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सरकार सिंह, शिव कुमार लखपत, जीशान, उमंग शुक्ला, नत्थू सिंह, विजय बहादुर और अनुराग सक्सेना ने कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। इस दौरान रघुनंदन सिंह, पवन कुमार, आशीष भारद्वाज, नरेंद्र सिंह, विजयपाल, अवनीश सक्सेना समेत दर्जनों कर्मचारी मौजूद रहे। अध्यक्षता विपिन कुमार रस्तौगी और संचालन मिनिस्टीरियल एसोसिएशन इरिगेशन डिपार्टमेंट के मंडल मंत्री अनुज कुमार गहलौत ने की।
प्रमुख मांगपत्र
- पुरानी पेंशन बहाल की जाए
- सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतनमान 26 हजार रुपये किया जाए
- संविदा और आउट सोर्सिंग बंद की जाए
- चिकित्सा प्रतिपूर्ति से संबंधित शासनादेश निरस्त कर कैश लैस सुविधा बहाल की जाए
- स्कीम वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा बहू, संगिनी, रसोइया, पीआरडी, मनरेगा श्रमिकों को राज्य कर्मी घोषित कर न्यूनतम 18 हजार वेतनमान किया जाए
- श्रम कानूनों में संशोधन वापस लेकर कारखानों में कानून का सख्ती से पालन कराया जाए
- मोटर व्हीकल एक्ट में ट्रांसपोर्ट विरोधी संशोधन लाए जाना बंद किया जाए
- रक्षा, रेलवे, बीमा, बिजली विभाग का निजीकरण बंद किया जाए
- बैंक कर्मियों को सातवां वेतनमान लागू किया जाए
- एमआईटी के बर्खास्त कर्मियों की सेवा बहाल की जाए