लगातार प्रदूषित हो रही आबोहवा चुनौती बन रही है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की रोक के बाद भी जमकर खुले में कूड़ा जल रहा है। यहां का प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए परेशानी बन रहा है। बुधवार को मुरादाबाद प्रदेश का दूसरा प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। शहर की हवा का गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 317 दर्ज किया गया। स्थिति यह है कि देश की राजधानी के साथ ही बड़े प्रदेशों की राजधानियों के प्रदूषण को भी पछाड़ दिया है। बुधवार को देश की राजधानी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 298 दर्ज किया गया।
दिन में चली हवाओं से शहर की आबोहवा में सुधार रहा। जैसे-जैसे दिन ढलता गया और हवा का बहाव कम हुआ, एक्यूआई में बढ़ोतरी होती गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार शाम पांच बजे से लेकर सात बजे तक एक्यूआई में वृद्धि दर्ज की गई। पहले एक्यूआई 135 था, जो 317 हो गया। हवा में पीएम 2.5 की औसत स्थिति 317 माइक्रो प्रति मीटर रही, जबकि अधिकतम 391 माइक्रो प्रति मीटर दर्ज की गई। वहीं, पीएम 10 की उपलब्धता औसत 214 माइक्रो प्रति मीटर, जबकि अधिकतम 422 माइक्रो प्रति मीटर तक पहुंच गई थी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि प्रदूषण सर्दी में बढ़ा रहता है। यह स्थानीय परेशानी है। मशीन घनी बस्ती में है। कुछ लोग कूड़ा भी जलाते हैं। इसके अलावा पास में ही बस स्टैंड है। एनसीआर में कुछ दिन पहले बारिश हुई है, इसलिए वहां पर प्रदूषण कम हुआ है। अभी हम ई-वेस्ट के निस्तारण का कार्य कर रहे हैं।
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक
वाराणसी 323
मुरादाबाद 317
बुलंदशहर 313
लखनऊ 295
कानपुर 295
नोएडा 293
आगरा 288
गाजियाबाद 287
मुजफ्फरनगर 284
राजधानी वायु गुणवत्ता सूचकांक
कलकत्ता 359
पटना 308
चेन्नई 308
अहमदाबाद 181
मुंबई 155
हैदराबाद 148
जयपुर 146