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सरकार क्रेशरों को राहत देने को तैयार

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मुरादाबाद।
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मंडल के 13 सौ गन्ना क्रेसरों का संचालन मौजूदा गन्ना सीजन में नहीं हो पाया था। चीनी मिलों की नीति के चलते गुड़ व खांडसारी उद्योग पर कई तरह के प्रतिबंध होते हैं। इनका संचालन न होने से पूरा गन्ना चीनी मिलों को खरीदना पड़ा। इसको देखते हुए गुड़ व खांडसारी उद्योग को बढ़ावा देने की गाइडलाइन जारी की गई हैं। इनसे मंडल की 22 शुगर मिलों पर गन्ने का दबाव कम हो जाएगा।
गन्ने की बंपर पैदावार ने इस बार चीनी मिल प्रबंधन को परेशान कर रखा है। चीनी का ज्यादा उत्पादन होने के चलते जहां उसके दाम गिर गए हैं। वहीं किसानों को गन्ने का भुगतान करना चुनौती बना हुआ है। इस बार गन्ने का क्षेत्र और बढ़ रहा है। इसको लेकर चीनी मिल प्रबंधन परेशान हैं। मिल प्रबंधन किसानों से गन्ना न बोने की अपील कर रहा है। गन्ना क्षेत्र बढ़ने, बंपर उत्पादन होने और मिलों के हाथ खींचने से शासन भी चिंतित है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी मिलों के सामने ज्यादा परेशानी क्रेशरों के न चलने से हुई है। चीनी मिलों पर गन्ना भाव ज्यादा रहने से किसानों ने क्रेशरों को गन्ना नहीं दिया। वहीं कई तरह के टैक्स लगे होने से क्रेशर महंगा गन्ना नहीं खरीद सके। शासन ने अगले गन्ना सत्र में क्रेशरों को चलवाने की रणनीति तैयार की है। सोमवार को गन्ना आयुक्त ने इसके लिए गुड़ व खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहित करने की नीति जारी की।
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गन्ना उपायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया कि अब गुड़ व खांडसारी उद्योग को चीनी मिलों के आठ किमी के बाहर के क्षेत्र में कहीं पर भी लगाया जा सकेगा। अभी तक इसका मानक 15 किमी था। गन्ना क्रय कर अधिनियम की धारा 1961 के तहत गुड़, गुल व जैगरी बनाने वाली इकाइयों को लाइसेंस मुक्त कर दिया गया है। इन पर गन्ना क्रय कर व जीएसटी भी नहीं लगेगा। इनपर शासन का गन्ना खरीद मूल्य प्रभावी नहीं होगा। इन इकाइयों को वेल्यू एडेड गुड़ बनाने के बावजूद टैक्स से बाहर रखा गया है। शासन ने गुड़ व खांडसारी उद्योग लगाने वालों को नई तकनीक वाले स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइस का प्रयोग करने वाला माडल भी प्रस्तुत किया। इससे उत्पादन की लागत कम होगी और ज्यादा लाभ मिलेगा।
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