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जंगली कुतों ने छात्रा को किया अधमरा-Cordination

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कुंदरकी।
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जंगली खूंखार कुत्तों ने हमला कर आठ साल की छात्रा को बुरी तरह से जख्मी कर दिया, जबकि चार बालिकाओं ने भागकर जान बचाई। जख्मी बालिका की हालत गंभीर होने पर उसको बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल को रेफर किया गया है।
कुंदरकी ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंडिया निवासी मजदूर मोहम्मद जान की आठ वर्ष बेटी गुलनाज गुरुवार की सुबह में अपनी बड़ी बहन गुलफ्शा और पड़ोसी ही रहने वाली तबस्सुम, रूखशाद और दरख्शा के साथ निकटवर्ती बाग से कच्चे आम लाने के लिए जा रही थी। बताते है कि जब यह सभी बालिकाएं गांव की आबादी से कुछ दूर जंगल में पहुंची तभी सात-आठ जंगली कुत्तों का झुंड दौड़ता आया और हमलावर हो गया। कुत्तों को चमका देकर चार बालिकाएं तो आबादी की ओर से भागने में सफल हो गई जबकि इन कुत्तों ने छात्रा गुलनाज को घेर लिया और उसके ऊपर टूट पड़े। कुत्तों के चुंगल में फंसे गुलनाज ने शोर मचा तभी रास्ते गुजर रहे पंडिया निवासी फिरोज अली ने बामुश्किल गुलनाज को कुत्तों के चुंगल बचाया, लेकिन फिर भी खूंखार कुत्तों ने गुलनाज के सिर, गर्दन, पीठ, पेट, जांघों और हाथ-पैरों से मांस नोंच कर गहरे जख्म कर दिए थे। अगर फिरोज को आने में पांच की देरी भी होती तो गुलनाज को जंगली कुत्तें अपना निवाला बना डालते।
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खून से लथपथ गुलनाज को पहले इलाज के लिए कुंदरकी पीएचसी में लाया गया। यहां पर प्राथमिक उपचार और एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के बाद में बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल को भेज दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. राजपाल ने बताया कि गुलनाज के वाइटल पार्ट्स पर गहरे जख्म है जिसके चलते उसकी हालत गंभीर है इसलिए बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। कुंदरकी क्षेत्र में फिर से जंगली कुत्तों का झुंड सक्रिय होने से ग्रामीणों में खलबली मची है वहीं बच्चों में दहशत छा गई है। ग्रामीणों का कहना था कि इससे पहले भी कई बच्चों को कुत्तों का झुंड हमले कर चुका है जिसमें एक बच्चें की जान जा चुकी है इसलिए जंगली कुत्तों को पकड़ा जाना जरूरी है।
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शरीर में जख्म-बंधी पट्टियां देख भर आई आंखें
कुंदरकी। मासूम बेटी के शरीर पर जख्म ही जख्म और बंधी पट्टियां देखकर मां शाहजहां की आंखों से आंसू झलक रहे थे। करहाती बेटी को देखकर वह बेहाल नजर आई। ग्राम पंडिया निवासी मजदूर मौहम्मद जान की पांच बेटे-बेटियां में से गुलनाज सबसे छोटी है। जख्मी गुलनाज के भाई जान मौहम्मद, चांद मौहम्मद, अहसान, गुलफ्शा और सगे सम्बंधी गम से बेहाल नजर आए। जख्मी गुलनाज की मां रो रोकर कह रही थी कि उसकी मासूम बेटी का कैसे इलाज होगा।
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