लावारिस हालत में मिल रहे मासूमाें के परिवार वालों को तलाशने में पुलिस नाकाम हो रही है जबकि दूसरी तरफ इन मासूमों को गोद लेने के लिए नि:संतान दंपती भी सामने आ रहे हैं। पिछले एक साल में करीब 60 नि:संतान दंपती ऐसे हैं, जिन्हाेंने लावारिस मासूमों को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है। जबकि गलशहीद में लावारिस मिले मासूम को गोद लेने के लिए 12 नि:संतान दंपती सामने आए हैं।
चाइल्ड लाइन की प्रभारी श्रद्धा ने बताया कि पुलिस और चाइल्ड लाइन का पहला प्रयास यहीं रहता है कि लावारिस हालत में मिलने वाले मासूमों के परिवार वालों का पता किया जा सके, जिससे की मासूमाें को उनके सुपुर्द किया जा सके। हालांकि, दुर्भाग्य से पिछले एक साल में मिले चार लावारिस मासूमों में से एक भी मासूम के परिवार वालों का पता नहीं चल सका है। चाइल्ड लाइन प्रभारी ने बताया कि जनपद में जब भी लावारिस मासूम मिलता है तो उसको गोद लेने के लिए नि:संतान दंपती सामने आते हैं। ऐसा हाल गलशहीद में लावारिस हालत में मासूम के मिलने के बाद भी है, अब तक 12 से अधिक नि:संतान दंपती ने मासूम को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है हालांकि इस तरह से मासूम को उनको मासूम को गोद नहीं दिया जा सकता है। मासूम को गोद लेने की इच्छा जाहिर करने वाले नि:संतान दंपती मुरादाबाद ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के भी रहने वाले हैं। उनको बताया गया है कि मासूम को गोद लेने के लिए नि:संतान दंपती कोे रजिस्टर्ड वेवसाइट ‘कारा’ पर आवेदन करना होता है। सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों के आधार पर ही नि:संतान दंपती किसी मासूम को गोद ले सकते हैं। शुरूआत में तीन महीने तक मासूम को गोद दिया भी नहीं जा सकता है।
अब रामपुर में होगी बच्चे की परवरिश
मुरादाबाद। गलशहीद में लावारिस हालत में मिले मासूम को परवरिश के लिए मंगलवार को रामपुर स्थित शिशुगृह में चाइल्ड लाइन ने पहुंचा दिया है। सार्ड चाइल्ड लाइन की प्रभारी श्रद्धा ने बताया कि अब बच्चे की देखभाल रामपुर में शिशुगृह में होगी। उसकी तबीयत में काफी सुधार भी है।