एआरवी न मिलने से रोजाना करीब 300 लोगों को जिले भर के सरकारी अस्पतालों से बैरंग लौटना पड़ रहा है। ऐसे में लोग निजी खर्च पर बाजार से एंटी रैबीज वैक्सीन खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। बीते करीब पांच दिन से जिले भर के सरकारी अस्पतालों में एआरवी न होने से मरीजों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
बीते करीब पांच दिन से जिले भर के सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन का अभाव है। ऐसे में पूरी उम्मीद के साथ दूर-दराज के इलाकों से एआरवी लगवाने आए मरीजों को बिना वैक्सीन लगवाए ही बैरंग लौटना पड़ रहा है। जिले में बहजोई समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी का अभाव है। ऐसे में रोजाना करीब औसतन 40 मरीज प्रति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हिसाब से जिले भर में करीब 300 से 400 मरीजों को बिना वैक्सीन के भटकना पड़ रहा है।
शुक्रवार को अपराह्न 3 बजे करीब बहजोई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बेटी अज्ञा को एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे विकासखंड गुन्नौर के गांव जड़वार निवासी संजीव का कहना था कि एआरवी के लिए भटकना पड़ रहा है। अब निजी खर्च पर ही बेटी को एआरवी लगवाने की मजबूरी बनी हुई है।
संज्ञान में है कि बीते दिनों से अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन का अभाव है। हाल ही में दो बार एआरवी लेने के लिए लखनऊ वाहन भेजा गया, लेकिन लखनऊ में ही मुख्यालय पर एआरवी नहीं है। दोनों बार वाहन बिना एआरवी लिए ही बैरंग लौट आया। अब लगातार उच्चाधिकारियों से एआरवी की उपलब्धता के लिए बातचीत की जा रही है।
अजय कुमार सक्सेना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला संभल