हादसे के वक्त नब्बे की स्पीड पर दौड़ रही राज्यरानी एक्सप्रेस का डिरेलमेंट इतना जबरदस्तथा कि तीन सौ मीटर तक पटरी उखड़ गई। स्लीपर चकनाचूर हो गए। डी - वन बोगी तो पूरी तरह से पलट गई। तेज आवाज के साथ बोगी में धूल ही धूल भर गई।
बोगियों की हालात और वहां के मंजर को देखने से ही यही लगता है कि यात्रियों का बचना किसी करिश्मे से कम नहीं रहा। रोजाना की तरह शनिवार सुबह राज्यरानी एक्सप्रेस मेरठ से लखनऊ के लिए निकली। समय से चल रही राज्यरानी एक्सप्रेस को मुरादाबाद के बाद अपने अगले स्टापेज रामपुर में रुकना था।
यात्रियों के मुताबिक ट्रेन पूरी स्पीड में थी। नब्बे किमी प्रति घंटा से अधिक की स्पीड में ट्रेन ने कोसी पुल का पार किया। तभी फ्लाईओवर के नीचे ट्रेन अचानक तेज आवाज के साथ पटरी से उतर गई। बोगी में धूल भर गई। झटका इतना तेज था कि तीन सौ मीटर पटरी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
स्लीपर से उखड़ कर अलग हो गई। वहीं स्लीपर चकनाचूर हो गए। दस बोगी पटरी से उतर गई। डी - वन बोगी पटरी से दूर जाकर पलट गई। वहां के हालात को देखने के बाद यात्रियों के बचने पर हर कोई कुदरत का करिश्मा ही मान रहा है।
रामपुर स्टेशन से दो किमी पहले हुए रेल हादसे में तीन फिट पटरी टूटकर पूरी तरह अलग गई थी। इसके बाद एक के बाद एक ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरते चले गए। जहां से पटरी टूटी थी वहां वेल्डिंग की गई थी। पटरी की मजबूती के लिए दोनों तरफ क्लिप लगाए गए थे।
ऐसा माना जा रहा है यहां पहले भी रेल फ्रैक्चर हो चुका था। कमजोर पटरियां रेलवे के लिए सिरदर्द बनने लगी है। रेल फ्रैक्चर आम होने लगे हैं। यहीं नहीं टूटी पटरी सेे ट्रेनों के गुजरने के बाद ड्राइवर और गार्ड को पता चलता है। शनिवार सुबह सात बजे मुरादाबाद से रामपुर की ओर निकली दीमापुर मालगाड़ी तो इस ट्रैक से सही सलामत गुजर गई।
लेकिन तीस मिनट बाद गुजरी राज्यरानी एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। अचानक तीन फिट पटरी टूटकर अलग गई। इंजन आगे निकल गई। जबकि दो को छोड़कर पीछे की सभी डिब्बे एक के बाद एक पटरी से उतरे चले गए।
जांच पड़ताल में पटरी टूटने वाली जगह पर ट्रैक वेल्डिंग की हुई पाई गई। ऐसा माना जा रहा है कि यहां पहले भी रेल फ्रैक्चर हो चुका था। फ्रैक्चर वाली जगह पर क्लिप भी लगाए गए थे।