दूसरी ओर कवच के लिए उत्तर रेलवे के 500 रेल इंजनों में डिवाइस लगाई जा चुकी है। अब काफी हिस्से में ट्रैक पर काम होना बाकी है। जोन में सबसे पहले दिल्ली-पलवल रेलखंड कवच प्रणाली के साथ ट्रेनें दौड़ाने के लिए तैयार है। इसके बाद गाजियाबाद-मुरादाबाद-लखनऊ खंड में काम होगा।
मुरादाबाद रेल मंडल में कवच और ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का काम 1500 करोड़ रुपये से होना है। ब्लॉक सिग्नलिंग पिलखुआ-डासना रेलखंड में पूरी हो चुकी है। डाउन लाइन पर रोजा व आसपास के स्टेशनों पर यह कार्य किया गया है।
इंजनों में लगाई गई रेडियो फ्रीक्वेंसी डिवाइस को ट्रैक पर लगने वाली डिवाइस के साथ जोड़ दिया जाएगा। इससे एक ही लाइन पर दो ट्रेनें होने की स्थिति में कुछ किमी की दूरी पर खुद ब्रेक लग जाएंगे और टक्कर नहीं होगी। वर्तमान में रेल मंडल में ट्रेनें बिना कवच प्रणाली के दौड़ रही हैं।
मुरादाबाद रेल मंडल में कवच तकनीक के लिए बजट मिलने से सुरक्षित रेल संचालन में मदद मिलेगी। इसके अलावा भविष्य की योजनाओं व तेज रफ्तार वाली ट्रेनें चलाने के लिए तीसरी व चौथी लाइन बिछाने का कार्य होगा। - आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम