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बीस बंदी एचआईवी पाजिटिव, 800 का जांच से इंकार

Mon, 21 Mar 2016 03:14 AM IST
मुरादाबाद/ अमर उजाला ब्यूरो
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बंदी
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जिला जेल में बंद 20 बंदी एचआईवी पाजिटिव निकले हैं। साथियों के एचआईवी पाजिटिव मिलने से जेल में बाकी बंदियों में हड़कंप की स्थिति है। खुद के एचआईवी पाजिटिव निकलने की आशंका में 800 बंदियों ने अपनी जांच कराने से इंकार कर दिया है।
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जेल प्रशासन पिछले कई दिनों से इन बंदियों की मान मनौव्वल करके इन्हें जांच के लिए तैयार करने की कोशिशों में जुटा है। बंदियों को मनाकर एचआईवी जांच कराने के लिए सोमवार को फिर से जेल में कैंप लगाया जा रहा है। आईजी जेल के आदेश पर प्रदेश की सभी जेलों में चिकित्सा विभाग के स्पेशल कैंप लगवाकर बंदियों की एचआईवी जांच कराई जा रही है।



मंडल की रामपुर जेल में जांच पूरी हो चुकी है और वहां आठ बंदी एचआईवी पाजिटिव निकले थे। लेकिन मुरादाबाद जेल जांच अधर में लटकी हुई है। यहां बड़े पैमाने पर बंदी एचआईवी पाजिटिव निकल रहे हैं। 2000 बंदियों की जांच में 20 बंदी जांच में एचआईवी पाजिटिव मिले हैं। जिससे डरे सहमे बाकी करीब 800 बंदियों ने अपना ब्लड सैंपल देने से साफ इंकार कर दिया है।
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बंदियों के इंकार की वजह से पिछले सप्ताहभर से जांच प्रक्रिया ठप पड़ी है। जेल प्रशासन हर रोज बंदियों को जांच के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया का कहना है कि जो 20 बंदी एचआईवी पाजिटिव निकले हैं उनमें से ज्यादातर वो हैं जिन्हें आरपीएफ की ओर से ट्रेनों में अवैध वेंडरिंग के आरोप में जेल भेजा गया है। रेलवे पुलिस की ओर से भेजे गए कई नशेड़ी भी इनमें शामिल हैं।
  एचआईवी पाजिटिव बंदियों की होगी काउंसलिंग जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया का कहना है कि जो भी बंदी जांच में एचआईवी पाजिटिव मिले हैं उनके लिए जेल में काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। ताकि ऐसे बंदी कहीं हकीकत जानने के बाद डिप्रेशन का शिकार न हो जाएं। ऐसे सभी बंदियों का इलाज भी जेल प्रशासन कराएगा। पहले इन बंदियों को अलग - अलग बुलाकर इनसे बात की जाएगी। जेलर का कहना है कि ऐसे बंदियों की निजता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।
  बरेली गए चार बंदियों को था एड्स दो साल पहले मुरादाबाद से बरेली सेंट्रल जेल भेजे गए चार बंदियों को बरेली केंद्रीय कारागार में हुई जांच में एड्स निकला था। ये चारों बंदी सजायाफ्ता थे और मुरादाबाद जेल से केंद्रीय कारागार को ट्रांसफर किए गए थे। उस वक्त भी बंदियों के एड्स से ग्रसित मिलने पर जेल के भीतर बंदियों में काफी हलचल हुई थी।
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