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हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर विकलांग हुए युवक को 20 लाख क्षतिपूर्ति के आदेश

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मुरादाबाद। जर्जर हाईटेंशन लाइन के तार के टूटकर गिरने से झुलसकर दोनों हाथ-पैरों से विकलांग हुए 20 वर्षीय युवक को थाई लोक अदालत ने बढ़ी राहत दी है। अदालत ने इस मामले में पीड़ित को 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि. के प्रबंध निदेशक, मुख्य अभियंता व अधिशासी अभिंयता मुरादाबाद को दिया है। कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की 50 फीसदी धनराशि विद्युतअधिकारियों के वेतन से काटने का भी आदेश दिया है।
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जिला संभल के मन्नीखेड़ा निवासी वीरसिंह का पुत्र हरेंद्र पाल (20) घर के ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरने से नौ जुलाई 2020 को गंभीर रूप से झुलस गया था। डाक्टरों को उसे बचाने के लिए उसके दोनों हाथ-पैर काटने पड़े। हाथ-पैर से विकलांग हो चुके हरेंद्र के पिता वीर सिंह ने इस मामले की सूचना विद्युत विभाग के अधिकारियों को दी। साथ ही अपने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से बिजली विभाग को इसके लिए दोषी ठहराते हुए अधिकारियों को नोटिस भेजा।
अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने एक जनवरी 2021 को अधीक्षण अभियंता को मामले की जांच रिपोर्ट भेजी। इस रिपोर्ट में शिकायतकर्ता वीरसिंह को ही हादसे में घायल होने और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो जाना दर्शाते हुए पीड़ित की ही गलती दर्शा दी गई। जबकि वीर सिंह और उनका पुत्र हरेंद्र दोनों ही जीवित हैं।
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वीर सिंह ने इस मामले में अपने अधिवक्ता के माध्यम से 29 दिसंबर 2020 को स्थाई लोक अदालत में वाद दायर करते हुए 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति व वाद व्यय की मांग की। इस वाद में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि. के प्रबंध निदेशक, मुख्य अभियंता व अधिशासी अभियंता को पक्षकार बनाया।
स्थायी लोक अदालत की सदस्य सुषमा रानी व वंदना सहाय ने मामले की सुनवाई करते हुए विद्युत विभाग के अधिकारियों को इस हादसे के लिए दोषी पाया और परिवादी को एक माह के अंदर 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति अदा करने तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है।
क्षतिपूर्ति की धनराशि का 50 प्रतिशत विपक्षीगण (बिजली विभाग के अधिकारियों) के वेतन से कटौती करने तथा समयावधि में आदेश का अनुपालन न करने पर परिवादी को निर्णय की तिथि से अंतिम तिथि तक नौ प्रतिशत ब्याज पाने का भी हकदार होने का आदेश दिया है।
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