इबादत की सरजमीं पर चालीस दिन गुजारकर जिले के 1500 से अधिक आजमीन हाजी बनकर वतन लौट आए। मंगलवार को जद्दा से आखिरी उड़ान भरी गई। वहीं हाजियों के वतन वापसी पर मोहल्लों में इस्तकबाल किया गया। हाजियों ने पाक सफर के दौरान आपबीती भी सुनाई।
शुरुआती चरण में हज पर गए आजमीनों के हज के अरकान पूरे होने के साथ ही उनकी वापसी शुरू हो गई थी। 28 सितंबर को शुरू हुआ ये सिलसिला 13 अक्तूबर तक चला। इस दौरान हर दिन जिले का कोई ना कोई हाजी वतन वापसी करता रहा। हाजियों को लेने दिल्ली एयरपोर्ट पर रिश्तेदार पहुंचते रहे। मंगलवार को जद्दा से आखिरी उड़ान भरी गई।
इसके साथ ही इस बार जिले से हज पर गए 1500 से अधिक हाजियों की सकुशल घर वापसी हो गई। इन हाजियों का मोहल्लों में फूल मालाओं से इस्तकबाल किया गया। हज ट्रेनर हाजी मुख्तार असलम ने बताया कि जिले से हज कमेटी की ओर से पाक सफर गए सभी हाजी वतन लौट आए हैं। मंगलवार जद्दा से आखिरी फ्लाइट आई।