पाकबड़ा। क्षेत्र के रतन रतनपुर कलां गांव में रहस्यमयी बुखार ने कोहराम मचा रखा है। यहां एक माह में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और लोगों का कहना है कि सभी इसी बुखार का शिकार हुए हैं। ग्रामीण इसे बुखार और काला पीलिया कह रहे हैं। इसके अलावा काफी लोग ऐसे हैं जो इस समय बीमार हैं और अपना उपचार करा रहे हैं। हैरत की बात यह है स्वास्थ्य विभाग इससे बेखबर है और यहां के बाशिंदे अपंजीकृत चिकित्सकों से अपना इलाज कराने को मजबूर हैं।
पाकबड़ा क्षेत्र के इस गांव में इस समय हाल बुरा है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने इस गांव में जाकर देखा तो स्थिति बद से बदतर मिली। लोगों ने बताया कि एक माह में इस गांव के निवासी फीस अहमद (47), शमीम अहमद (48), हाजी यामीन (60), उनके सगे भाई अब्दुल मुबीन (53), मजीद हुसैन (55), अब्दुल गनी (59), अफसर (50), रमेश (48), मोहित सैनी (8), उसकी सगी भाभी अनीता (27), उर्मिला (50), राम किशोर (60), हरि सिंह (50), मदन (45), रामवती (55) की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इसका कारण यही बुखार और काला पीलिया रहा है। इस समय भी काफी लोग बीमार हैं और अस्पतालों में पड़े हैं।
मोहित के पिता नन्हें सैनी ने बताया की उनके बेटे को अभी पन्द्रह दिन पहले बुखार आया था इसके बाद वह उसे नया मुरादाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में ले गये थे यहां पर उनसे हजारों रुपये भी ले लिए और एक रात मोहित को भर्ती कराने के बाद उसके बेटे की अगले दिन मौत घोषित कर दी गई थी। उसने मौत का कारण पूछा तो उसे कुछ भी नहीं बताया गया था। इससे पहले उसकी परिवार की अनीता की मौत बुखार के चलते चलते हो गई थी।
गांव निवासी अब्दुल मुबीन को दस अक्टूबर को बुखार आया था उसकी मौत हो गई इसके दस दिन बाद उनके बड़े भाई हाजी यमीन को 24 अक्टूबर को बुखार आया और उनकी भी मौत हो गई। गांव के अधिकतर घरों में बुखार और पीलिया से पीड़ित लोग हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवा नहीं होने से लोगों को अपंजीकृत चिकित्सकों की शरण में जाना पड़ रहा है।
ग्रामीण अनीस अहमद ने बताया की गांव में बुखार फैला हुआ है। दर्जनों लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है लेकिन फिर भी जिले का स्वास्थ्य विभाग बेखबर बना हुआ है। गांव के लोगों को भारी परेशानी हो रही है लोग कर्ज लेकर इलाज करा करा रहे हैं। गांव के पूर्व प्रधान विक्रम सिंह कहते हैं कि बुखार से लगातार मौतों हो रही है। यदि एक साल का हिसाब लगाया जायेगा तो मौतों का आंकड़ा सैकड़ों में पहुंच जायेगा। सरकारी स्वास्थ्य विभाग को कई बार मदद के लिए कहा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
अस्पताल खुले तो ही बात बने: प्रधान
ग्राम प्रधान खचेडू सिंह कहते हैं कि गांव में बुखार है पर हाकिम इसके गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अस्पताल बंद होने के कारण लोगों को भारी परेशानी हो रही है लेकिन फिर भी प्रशासन ने अस्पताल नहीं खोला है। सरकारी अस्पताल खुल जाए तो गांव के लोगों की परेशानी कुछ कम हो।
गांव में न पीने का साफ पानी, न ही साफ सफाई
पाकबड़ा। रतनपुर कलां गांव में गंदगी चारों ओर फैली हुई है। नालियों का पानी सड़कों पर फैला हुआ है। गंदगी के चलते मच्छर बहुत ज्यादा हैं। पीने का साफ पानी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। सरकारी हैंडपंपों की हालत खराब है। अधिकतर नल खराब पड़े हैं। इनको ठीक करने के लिए ग्रामीण कई बार मांग कर चुके है लेकिन इसको ठीक नहीं कराया गया है।
बंद पड़ा स्वास्थ्य केंद्र कैसे करे लोगों का इलाज
रतनपुर कलां और उसके आसपास के दर्जनों गांव के लिए स्वास्थ्य सेवाऐं देने लिए गांव में एक बड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना है लेकिन यह खुद ही बीमार है। लॉकडाउन से पहले ही इसे बंद कर दिया था। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद खुलने के निर्देश आये थे लेकिन अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी कोरोना संक्रमित हो गये है । वह जिला अस्पताल में क्वारंटीन हो कर अपना इलाज करा रहे हैं। अस्पताल में तैनात फार्मेसिस्ट को जिला अस्पताल में डयूटी पर लगा दिया गया है और वार्ड ब्वाय रिटायर हो गया है। इसलिए अस्पताल को बीते करीब आठ माह से खोला ही नहीं जा जका है।
निगरानी रख रहे थे पर मैं खुद कोरोना पाजिटिव हो गया: चिकित्साधिकारी
रतनपुर कलां सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. सौरभ कुमार ने बताया की वह खुद कोरोना पीड़ित हो गये हैं। जिला अस्पताल में क्वांरटीन है लेकिन उन्होंने इससे पहले चार बार गांव की जांच कराई थी। लगातार गांव पर ब्लाक से निगरानी की जा रही है लेकिन अब यह मौतें कैसे हो गई इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। लॉकडाउन में अस्पतालों को बंद करने के निर्देश आये थे इसलिए अस्पतालों को बंद कर दिया था अब खुलने के निर्देश आये है लेकिन वह खुद कोरोना संक्रमित हो गये है। वह ठीक होने के बाद इस सीएचसी को खोलकर मरीजों का इलाज करेंगे।
गांव में बुखार फैलने के बाद भी नही जागरूक हो रहे ग्रामीण
बिना मास्क लगाये बाह निकाल रहे है अधिकांश लोग
पाकबड़ा। कोरोना गाइडलाइन का पालन करने में ग्रामीण भी भारी लापरवाही बरत रहे हैं। इतनी मौतों के बाद भी गांव में जागरूकता का पूर्ण अभाव है। अधिकांश ग्रामीण बिना मास्क के ही गांव में खुलेआम घूमते हैं। सामाजिक दूरी के नियम का कोई पालन ही नहीं हो रहा है। लोगों की लापरवाही कहीं और बड़ी परेशानी का सबब न बन जाए।
यहां यदि इस तरह के हालात हैं तो वाकई चिंता की बात है। मैं शनिवार को ही टीम भेजकर यहां लोगाें की जांच कराता हूं कि आखिर क्या कारण है कि लोग इस कदर बीमार हो रहे हैं। यहां के लोगों को पूरी चिकित्सीय सुविधा देने का प्रयास करेंगे- डा. एमसी गर्ग, सीएमओ