मुरादाबाद। टीबी मरीजों के परिवारों को संक्रमण से बचाने के लिए चलाए जा रहे टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) कार्यक्रम में मुरादाबाद की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में टीबी मरीजों के संपर्क में आए 1470 लोग टीपीटी के पात्र पाए गए, लेकिन इनमें से केवल 920 लोगों का ही उपचार शुरू कराया जा सका। इस लापरवाही से अन्य लोग भी टीबी संक्रमित हो सकते हैं।
मंडल के अन्य जिलों की तुलना में मुरादाबाद पिछड़ता नजर आ रहा है। बिजनौर ने 2549 पात्र लोगों में से 1780 को टीपीटी दिया गया। यानि 70 प्रतिशत लोगों को इलाज मिला। रामपुर ने 1916 पात्रों में से 1316 लोगों को उपचार मिला। संभल ने भी शुरुआती खराब स्थिति से उबरते हुए 67 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज कर मुरादाबाद को पीछे छोड़ दिया। मुरादाबाद में पात्र लोगों में से महज 63 फीसदी को ही उपचार मिला। आंकड़ों के मुताबिक 20 अप्रैल तक मुरादाबाद में स्थिति और भी कमजोर थी। उस समय 1280 पात्र लोगों में से सिर्फ 803 को ही टीपीटी शुरू कराया गया था। पांचों जिलों की समग्र रिपोर्ट पर नजर डालें तो मंडल स्तर पर कुल 8049 लोग टीपीटी के पात्र पाए गए, जिनमें से 5565 लोगों को उपचार शुरू कराया गया। वहीं पूरे प्रदेश में एक लाख से ज्यादा पात्र लोगों में से 58,880 को टीपीटी दिया गया, जो 57 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के अनुसार यह इलाज (टीपीटी) उन लोगों को दिया जाता है जो टीबी मरीजों के सीधे संपर्क में रहते हैं, ताकि संक्रमण फैलने से पहले ही बीमारी को रोका जा सके। ऐसे में मुरादाबाद में पात्र लोगों तक समय पर उपचार न पहुंच पाना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह का कहना है कि यह 30 अप्रैल तक का आंकड़ा है। इसके बाद स्थिति में सुधार हुआ है। प्रदेश के मुकाबले मुरादाबाद के आंकड़े बेहतर हैं।
गंभीर टीबी मरीजों की पहचान में फिसड्डी
डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत गंभीर मरीजों की पहचान और विशेष निगरानी में भी मुरादाबाद की हालत खराब रही। जिले में 1028 टीबी मरीज नोटिफाइड हुए, लेकिन इनमें से केवल 458 मरीजों का ही आकलन किया गया। यह मात्र 45 प्रतिशत है। बिजनौर 68 और रामपुर 69 प्रतिशत तक पहुंच चुके हैं। 20 अप्रैल तक मुरादाबाद की स्थिति और खराब थी, जब सिर्फ 15 प्रतिशत मरीजों का ही आकलन हो सका था।
पोषण किट बांटने में मुरादाबाद सबसे आगे
टीपीटी में पिछड़ने के बावजूद पोषण किट वितरण में मुरादाबाद मंडल में सबसे आगे रहा। जिले में 4169 टीबी मरीजों में से 2995 मरीजों को कम से कम एक पोषण किट दी गई। यह 84.61 प्रतिशत उपलब्धि है। बिजनौर 77.5 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि रामपुर में यह आंकड़ा 50.31 और संभल में 49.2 प्रतिशत दर्ज किया गया। अमरोहा की स्थिति सबसे खराब रही, जहां केवल 12.2 प्रतिशत मरीजों तक ही पोषण किट पहुंच सकी।