सोमवार को महाशिवरात्रि का पर्व है। त्योहार को हर्षोल्लास से मनाने के लिए शहरवासी भोले की भक्ति में डूबे हुए हैं। हरिद्वार से कांवड़ के जत्थे आने की वजह से कांठ रोड़ पूरी तरह से केसरिया रंग में रंग गया। कंधे पर कांवड़ और मुंह पर जय भोले के उद्घोष चलते राहगीरों का ध्यान खींच रहा है। इसकी वजह से पूरा वातावरण भक्तिमय हो रहा है। जगह-जगह लगे पंडालों की वजह से मेले जैसा माहौल हो रहा था।
गंगाजल से जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए युवा ही नहीं, बल्कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी उत्साह से लबरेज नजर आ रहे थे। जत्थों के साथ ट्रैक्टर और मेटाडोर पर लगे-लगे बड़े-बड़े साउंड सिस्टम से भोलेबाबा के भजनों के संग देशभक्ति के गीत माहौल में भक्ति के साथ देशप्रेम की भावना पैदा कर रहे थे। पैरों में घुंघरू, बदन पर केसरिया वस्त्र और होठों पर भोले का नाम लेते हुए अपने-अपने यहां शिवालयों पर कांवड़ चढ़ाने के लिए आगे बढ़ रहे थे। रविवार को भी रामपुर, मिलक, बरेली के अलावा मुरादाबाद के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कांवड़िए गुजरे। हालांकि दिन में बारिश न होने से काफी राहत महसूस हुई। कभी बादल और कभी धूप की लुकाछिपी से सर्द मौसम कांवड़ियों के अनुकूल हो रहा था। खिलौने और तिरंगे से सजी हुई कांवड़ आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। कांवड़ियों के स्वागत के लिए कांठ रोड पर जगह-जगह पंडाल लगे हुए हैं। वहां पर उनके लिए नाश्ते, भोजन, आराम और उपचार की व्यवस्था है। श्रद्धालु कांवड़ियों की सेवा में तत्पर हैं। उनकी कांवड़ को खुद लेकर कांवड़ियों को आराम करवा रहे हैं। इसके अलावा राहगीरों को भी बेर, हलवा, ठंडाई आदि का प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
शहर के बाहर स्वागत को पहुंची महिलाएं
जिन घरों से पुरुष सदस्य कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार गए थे, उनके लौटने पर स्वागत करने के लिए महिलाएं अगवानपुर तक पहुंच गईं। वहां से वह खुद कांवड़ लेकर शिवालय की ओर आईं। उनके साथ युवतियां व बड़ी संख्या में बच्चे भी थे। सभी भोले की भक्ति में उमंग और उल्लास में डूबे हुए थे।