बिलारी (मुरादाबाद)।
विभाजन के बाद कराची में जा बसी बिलारी क्षेत्र के इब्राहीमपुर मिर्जा की बीबी बतूल (88) की अपने मूल वतन हिंदुस्तान की मिट्टी में दफन होने की आखिरी हसरत पूरी हो गई। छह दिन पहले बेटे के साथ आई बीबी बतूल के सीने में अचानक दर्द होने पर मौत हो गई। उन्हें इब्राहीमपुर मिर्जा गांव के कब्रिस्तान में दफनाया गया। वृद्धा की नमाजे जनाजा में लोगों की भारी भीड़ जुटी।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कराची शहर के थाना न्यू कराची सेक्टर पांच जी ईदगाह मैदान निवासी अब्दुल मजीद की पत्नी बीबी बतूल (88) 25 फरवरी को अपने बड़े बेटे शेख खलीलुर्रहमान के साथ बिलारी तहसील के थाना हजरतनगर गढ़ी अंतर्गत मुरादाबाद जिले की सीमा पर स्थित इब्राहीमपुर मिर्जा गांव आई थीं। शनिवार की शाम लगभग आठ बजे अचानक उनके सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। बेटा शेख खलील और खलील का चचेरा भाई बीबी बतूल को बाइक पर बैठाकर निकट के मोहम्मदपुर टांडा गांव में एक निजी चिकित्सक के अस्पताल पर ले गए। यहां चिकित्सक ने वृद्धा को देखते ही मृत घोषित कर दिया।
पाकिस्तानी महिला बीबी बतूल की इब्राहीमपुर मिर्जा गांव में अचानक मौत हो जाने की खबर पर शनिवार की रात से ही स्थानीय अधिसूचना इकाई और संबंधित पुलिस ने सक्रिय होकर जानकारी जुटानी शुरू कर दी। रविवार की दोपहर इब्राहीमपुर मिर्जा गांव में पहले बीबी बतूल की जनाजे की नमाज हुई उसके बाद इसी गांव के कब्रिस्तान में उन्हें दफन कर दिया गया। नमाजे जनाजा में इब्राहीमपुुर और आसपास के ग्रामों के लोगों की भीड़ मौजूद रही। दफन की प्रक्रिया के दौरान भी स्थानीय अधिसूचना इकाई और पुलिस कर्मी मौजूद रहे। मृतका बीबी बतूल के साथ आए उसके बेटे शेख खलीलुर्रहमान (58) ने बताया कि उसकी मां अक्सर कहा करती थीं कि उनकी हसरत है कि उनका दफन अपने मूल वतन की मिट्टी इब्राहीमपुर मिर्जा गांव में हो। वर्ष 2014 और 2016 में भी बीबी बतूल इब्राहीमपुर मिर्जा गांव में परिवार वालों के शादी समारोह में शामिल होने आई थी।
हिंद पाक बंटवारे के दौरान दंपती चले गए पाकिस्तान
बिलारी। बिलारी तहसील के दक्षिणी सीमांत इब्राहीमपुर मिर्जा गांव के मूल निवासी अब्दुल मजीद और उनकी पत्नी बीबी बतूल हिंद पाक बंटवारे के दौरान पाकिस्तान चले गए। फिर वहीं जाकर स्थायी रूप से बस गए। पाकिस्तान में रहने के दौरान भी दंपती का अपने मूल वतन से प्यार बना रहा।
इब्राहीमपुर मिर्जा के बुजुर्गों का कहना है कि अब्दुल मजीद, मसीत, रसीद और अजीज आदि चारों सगे भाई गांव में ही रहकर खेती किसानी करते थे। अब्दुल मजीद की शादी अपने गांव से लगभग दस किमी. दूर फतेहपुर सराय गांव में बीबी बतूल के साथ हुई। अब फतेहपुर सराय गांव कोतवाली और जिला संभल में आता है। हिंद पाक बंटवारे के दौरान 1948 में मजीद अपनी पत्नी बीबी बतूल को साथ लेकर पीलीभीत में एक दरगाह पर हाजिरी देने और दुआ मांगने गए। वहां उनका एक दोस्त अपने साथ पाकिस्तान के कराची शहर में घुमाने के लिए ले गया। जैसे ही उन्होंने वापस भारत आने का मन बनाया तब तक दोनों देशों की सीमा पर पाबंदी लग चुकी थी। ऐसी स्थिति में मजीद पत्नी को लेकर कराची में ही रहने लगे और वहीं पर अपना कारोबार शुरू कर दिया।