सिविल लाइन स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भवन महज ईंट और सीमेंट से बनी इमारत नहीं है। इसमें मुरादाबाद के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का इतिहास संजोया है। भवन की हर दीवार पर सेनानियों की वीरगाथाएं और तस्वीरें टंगी हैं। देश के महान सेनानियों के साथ उनकी प्रतिमाएं अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बहादुरी की गाथाओं का एहसास कराती हैं।
मुरादाबाद जिला स्वतंत्रता सेनानियों का गढ़ रहा है। 1857 की क्रांति से लेकर देश की आजादी तक मुरादाबाद के वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की। अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने को मजबूर किया। 1857 में सम्राट बहादुर शाह जफर ने मज्जू खां को मुरादाबाद का हाकिम घोषित किया। बहादुरी से मज्जू खां ने अंग्रेजी फौज से मुकाबला किया और फौज को नैनीताल भागने को मजबूर किया। मुरादाबाद के लोगाें को अंग्रेजी फौज की कैद से आजाद कराया। 10 माह बाद अंग्रेजी ने दोबारा से हमला कर कत्लेआम कर मुरादाबाद पर कब्जा कर लिया। गलशहीद कब्रिस्तान स्थित इमली के पेड़ पर लोगों को फांसी पर लटकाया गया।
1930 के टाउन हॉल गोली कांड से लेकर आजादी के आंदोलन तक मुरादाबाद के सैकड़ों जांबाजों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की। महान स्वतंत्रता सेनानियों की याद में सिविल लाइन में स्वतंत्रता सेनानी भवन बना है। भवन 1994 में बनकर तैयार हुआ। सेनानियों की पेंशन के अशदान से भवन की नींव पड़ी। यह भवन आज सेनानियों की यादों को समेटे हैं। भवन आज भी जरूरतमंदों के लिए खुला है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की ओर से हर जरूरतमंद (राजनीतिक दलों को छोड़कर) को सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए निशुल्क हॉल मुहैया कराया जाता है।
- संगठन का मकसद नई पीढ़ी को सेनानियों के इतिहास से रूबरू कराना और जरूरतमंद लोगों की सेवा कार्य है। इसी मकसद से भवन का हॉल निशुल्क सामाजिक कार्यक्रमों के लिए आवंटित किया जाता है। स्थानीय प्रशासन को स्कूल के बच्चों को सेनानी भवन का शैक्षिक भ्रमण करवाना चाहिए, ताकि बच्चे आजादी के इतिहास से रूबरू हो सकें।
- धवल दीक्षित, कार्यवाहक महामंत्री स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन