मुरादाबाद। जिला मुख्यालय से करीब तीस किलोमीटर दूर स्थित नगला जटनी गांव के लोगों से अब तक निर्वाचित हुए संभल के 12 सांसद और कुंदरकी के 14 विधायक वोट तो लेते रहे लेकिन उनके लिए जरूरी महज 650 मीटर रास्ते को पक्की सड़क में तब्दील नहीं करा पाए। इस विधानसभा चुनाव में भी प्रचार को पहुंचे प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने सड़क की मांग पर फिर आश्वासन की घुट्टी पिलाई लेकिन पूर्व के अनुभवों से पक चुके ग्रामीण पहले सड़क की मांग पर अड़ गए। मांग पूरी न होने पर मतदान के सामूहिक बहिष्कार के फैसले तक पहुंच गए।
दरअसल 650 मीटर का यह कच्चा रास्ता 1165 की आबादी वाले इस गांव की लाइफ लाइन है। इसी रास्ते से बच्चे व शिक्षक स्कूल का सफर तय करते हैं तो गांव के मंदिर-मस्जिद तक पहुंचने के लिए भी लोग इसी राह पर निर्भर हैं। अंतिम विदाई के समय शव को श्मशान या कब्रिस्तान तक ले जाने के लिए भी इसी रास्ते का प्रयोग करना होता है। फिलहाल ये कच्चा रास्ता कीचड़ से घिरा है।
विधानसभा चुनाव में तमाम प्रत्याशी ही नहीं, मतदान के इंतजामों के लिए अधिकारी-कर्मचारी भी गांव में पहुंचे। ग्रामीणों के बीच से कच्चे इस रास्ते की पुरानी मांग सामने आई तो चुनाव बाद सड़क बनवाने का भरोसा दिया गया। ग्रामीणों ने साफ-साफ कह दिया कि हर चुनाव में ऐसे ही भरोसा और आश्वासन मिला है लेकिन पक्की सड़क नहीं मिली।
विधानसभा सीट के हिसाब से नगला जटनी गांव कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में आता है, जबकि संसदीय क्षेत्र संभल है। चुनावी इतिहास के लिहाज से संभल लोकसभा सीट वर्ष 1977 से अस्तित्व में आई है। अब तक इस सीट से 12 सांसद चुने जा चुके हैं। कुंदरकी विधानसभा सीट पर 1967 से चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब तक 14 विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियां बदल गईं लेकिन गांव के प्रमुख रास्ते के मामले में जनप्रतिनिधियों या प्रत्याशियों का जवाब नहीं बदला। हर चुनाव में परिणाम आने के बाद तत्काल पक्की सड़क का आश्वासन दिया गया लेकिन चुनाव निपटने के बाद किसी ने इस रास्ते या ग्रामीणों की समस्या की सुध नहीं ली। यही वजह है कि इस विधानसभा चुनाव में मतदान के सामूहिक बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा।
भविष्य के चुनावों के बहिष्कार का भी एलान
पक्की सड़क के स्थान पर सिर्फ आश्वासन मिलने से गुस्साए नगला जटनी गांव के लोगों ने भविष्य में होने वाले किसी भी चुनाव में मतदान न करने का एलान किया है। उनका कहना है कि पक्की सड़क न बनी तो आने वाले लोकसभा चुनाव समेत तथा अन्य किसी भी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि 14 फरवरी को मतदान के लिए रजामंद करने की कोशिशों में प्रत्याशियों, नेताओं, अफसरों ने बिना देरी सड़क का काम शुरू कराने का भरोसा दिया था लेकिन मतदान का वक्त पूरा होने के बाद किसी ने गांव का रुख नहीं दिया
कार सेवा से शुरू की रास्ते की मरम्मत
नेताओं और अफसरों के वादों के बाद भी नगला जटनी गांव में सड़क न बनने से परेशान ग्रामीणों का सिस्टम से भरोसा टूटता जा रहा है। बुधवार को ग्रामीणों ने खुद ही मिट्टी डालकर बदहाल रास्ते को सुधारने का काम शुरू किया है। मिलजुल कर सभी ग्रामीण इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं।
जनप्रतिनिधि हमारे गांव में केवल चुनाव के वक्त वादे करने आते हैं, लेकिन इसके बाद गांव की ओर कोई नहीं देखता। वर्षों से इस सड़क के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सड़क नहीं बन पाई है।
छत्रपाल सिंह
रैली और जनसभाओं में विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेता एक बार हमारे गांव में आकर देखें। इसके बाद ही विकास की बातें करें। हमारे गांव की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
ध्यान सिंह
जनाजे और अर्थी के समय रास्ते की कीचड़ बड़ी मुसीबत खड़ी करती है लेकिन मजबूरी में अंतिम यात्रा इसी बदहाल रास्ते से ले जानी होती है। वर्षों से अफसरों को प्रार्थनापत्र दे रहे हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
अमर सिंह
विधानसभा चुनाव में हमारे गांव ने मतदान का बहिष्कार किया है। अगर आगे भी अधिकारियों ने इस रास्ते को नहीं बनवाया तो लोकसभा और अन्य चुनावों में भी हम मतदान नहीं करेंगे। पहले सड़क मिले फिर वोट डाले जाएंगे।
बब्बन हुसैन
हम लोगों ने प्रचार करने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थकों से भी कहा था कि हमारे गांव की सड़क बनवा दो, वरना हम मतदान नहीं करेंगे। अफसरों को भी इसकी सूचना भेजी गई थी। लेकिन अधिकारियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया।
दलवीर सिंह
नगला जटनी गांव की सड़क बनवाने के लिए मैंने काफी प्रयास किया, लेकिन अभी सफलता नहीं मिल पाई है। आगे भी मेरा प्रयास जारी करेगा। पूरा गांव मेरा है और मैं अपने गांव वासियों के साथ हूं।
यासीन, प्रधान
नगला जटनी गांव के लोगों ने मताधिकार का अवसर खो दिया। मांगें मनवाने का ये तरीका गलत है। सड़क पहले से चिह्नित है। चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
लोग सड़क निर्माण की मांग कर रहे थे। इसलिए उन्होंने मतदान का बहिष्कार कर दिया था। दोबारा मतदान का निर्णय चुनाव आयोग को लेना है। पीठासीन अधिकारी की ओर से रिपोर्ट भेजी गई है।
श्वेता वर्मा, बीडीओ, कुंदरकी ब्लाक
नगला जटनी में मैंने दो सड़कों का निर्माण कराया था। एक सड़क खराब है। उसका भी निर्माण कराया जाएगा। मैंने लोगों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मतदान नहीं किया। शुक्रवार को गांव में जाकर लोगों से बात करूंगा।
हाजी रिजवान, विधायक कुंदरकी