वन विभाग के पिंजरों और कैमरों के आसपास तक तेंदुआ नहीं पहुंचा है, लेकिन उसकी चहलकदमी कई गांवों तक बढ़ गई है। शनिवार को बालापुर और मुनीमपुर के साथ ही गजरौला, जय सिंहपुर आदि गांवों और उस क्षेत्र के जंगलों में तेंदुआ पहुंचा। पैरों के निशान देखकर वन विभाग की टीम ने इसकी पुष्टि की है। इससे लोगों में खौफ बढ़ता जा रहा है।
वन विभाग ने तेंदुआ पकड़ने के लिए क्षेत्र में दो पिंजरा और 10 डे-नाइट विजन वाले कैमरे लगाए हैं। इनके सहारे तेंदुओं की तलाश की जा रही है। इसके बावजूद चिह्नित क्षेत्रों में तेंदुए की कोई गतिविधि रिकार्ड नहीं की जा सकी। इसके साथ ही ठाकुरद्वारा क्षेत्र के कई गांवों के आसपास और जंगलों में तेंदुए के पैरों के निशान मिले हैं। वन विभाग के अफसर और जीव विशेषज्ञ तेंदुओं की तलाश में जुटे हैं। तेंदुओं को बेहोश करने वाली टीम भी पहुंच गई है। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के साथ डब्ल्यूटीआई की दस टीम क्षेत्र में हैं। शनिवार को बारिश होने के कारण ड्रोन कैमरों का प्रयोग नहीं किया जा सका। अब इनका प्रयोग रविवार को किया जाएगा। वन विभाग के अफसरों ने कंट्रोल रूम बनाकर निगरानी शुरू कर दी है। रात में विशेषज्ञ गस्त कर रहे हैं।
फीका और रामगंगा नदी का क्षेत्र बना अफसरों का सिरदर्द
नदियों के किनारे से लेकर आबादी तक गन्ने की फसल खड़ी हैं। इन नदियों का एक किनारा उत्तराखंड से लगता है। नदियों को पार करते ही तेंदुआ गन्ने के खेतों में आ जाते हैं। ऐसे में उनको पता ही नहीं चलता है कि जंगल कहां खत्म हो गया और वह गांव तक पहुंच रहे हैँ। विशेषज्ञों ने नदियों के किनारे के 10 किमी क्षेत्र में गन्ने की फसल बोने पर रोक लगाने की मांग की है।
बकरे की बलि देकर पकड़ेंगे तेंदुआ
जिला वन अधिकारी कन्हई सिंह पटेल ने बताया कि अफसरों ने पिंजरे में तेंदुए के न आने को गंभीरता से लिया है। अब पिंजरों के बाहर बकरे बांधे गए हैं। जब तेंदुआ बकरे का शिकार कर लेगा तो दूसरी बार में पिंजरे में बकरा बाधा जाएगा। उसके बाद ही तेंदुआ पिंजरे में आ सकता है।