मुरादाबाद। एनजीटी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद रामगंगा के सहारे गंगा तक जहरीला पानी बहने से नहीं रोका जा सकेगा। अधिकारियों की लापरवाही से रामगंगा किनारे पड़ी हजारों टन ई-डस्ट को साफ नहीं कराया जा सका है। बरसात शुरू हो गई हैं। ऐसे में ई-डस्ट केरूप में पड़े केमिकल कचरे का पानी में बहकर गंगा तक पहुंचना और वहां तक प्रदूषण फैलाना तय माना जा रहा है।
ई-कचरे के धंधेबाजों ने रामगंगा किनारे कचरे को जलाकर ई-डस्ट के ढ़ेर लगा दिए हैं। अफसरों की लापरवाही से यहां पर धड़ल्ले से ई-कचरे को जलाया जाता रहा। ऐसे में रामगंगा के किनारे पर हजारों टन ई-डस्ट पड़ी हुई है। इस मामले को एनजीटी में उठाया गया था। एनजीटी ने इस मामले में डीएम पर 10 और शासन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया हुआ है। उसकेबावजूद अधिकारियों ने ई-डस्ट को उठवाने में गंभीरता नहीं दिखाई। इसकेऊपर मिट्टी फैलाकर जमीन में दबाने का प्रयास किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार ई-डस्ट का रिसाव मिट्टी में दबाकर या साधारण तरीके से पालीथीन से झककर नहीं किया जा सकता है। इसको सुरक्षित दबाने के लिए मेडिकल कचरे वाले डंपिंग सेल का प्रयोग किया जाता है। ई-डस्ट हवा में उड़कर और पानी में बहकर भूजल तक पहुंच जाता है। इसका असर कई किमी दूर तक के भूजल पर होता है। बरसात में इसके भूजल में मिलने में रामगंगा में बहने की आशंका बढ़ जाती है। रामगंगा के पानी के सहारे यह पूरे क्षेत्र के भूजल को दूषित करेगी और गंगा तक पहुंच जाएगी। इससे गंगा में इस केमिकल कचरे का प्रदूषण फैलेगा।
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ई-डस्ट को सुरक्षित डंप कराने केलिए आईआईटी से विकल्प मांगे गए हैं। विकल्प उपलब्ध होते ही उसको सुरक्षित ठिकाने लगवा दिया जाएगा। अब रामगंगा के किनारे कड़ी चौकसी की जा रही है, जिससे कोई वहां तक ई-कचरा नहीं ले जा सके। पूरा मामला प्रशासनित अधिकारियों के निर्देशन में चल रहा है। - आरके सिंह, आरओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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