हाईड्रोफोबिया की चपेट में आने से एक और छात्रा की जान चली गई। कुत्ते के काटने पर पीड़िता को एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया बल्कि घरेलू इलाज करने के अलावा झाड़ फूंक कराने में लगे रहे। सही इलाज न मिलने से बच्ची हालत बिगड़ गई।
उसे पानी से डर लगने लगा, हाईड्रोफोबिया के अन्य लक्षण देखने को मिले। लेकिन घर वालों ने ध्यान नहीं दिया। सोमवार को बच्ची ने दम तोड़ दिया। कुंदरकी ब्लाक क्षेत्र केे ग्राम ईंधनपुर नगला निवासी दिनेश सिंह की 11 वर्षीय बेटी नेहा कोे एक माह पहले कुत्ते ने हमला कर काट लिया था।
काटने से नेहा के चेहरे पर जख्म हुए थे। बताते हैं कि छात्रा के सरकारी अस्पताल में एंटी रैैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाए बल्कि उसकी मां कांति देवी ने घरेलू इलाज के तहत ही पिसी मिर्च कोे सरसों के तेेल में मिला कर जख्मों पर लगा दिया था। धीरे-धीरे कुत्ते के काटने के शरीर में जख्म तो भर गए लेकिन रैबीज का असर नेहा के शरीर में बढ़ता रहा।
एक माह केे बाद जब नेहा के दिमाग पर रैैबीज का असर हुआ तो वह पानी-आग को देखकर डरने लगी और उसकी हरकतें भी सामान्य हालात जैसी नहीं रही जिसको बाद में परिजनों ने कई चिकित्सकों को दिखाया लेकिन कोई आराम नहीं हुआ और छात्र की मौत हो गई।