लखनऊ की कंपनी वेब वेवर्स एक छोटी सी कंपनी है। जब इसने वर्ष 2010 में आईआईएम लखनऊ द्वारा आयोजित कैट में पहली बार वेबसाइट मेंटेनेंस का ठेका लिया तो इसे हर महीने 26 हजार रुपये ही दिए जाने का करार हुआ था।
लालच में फंस गई कंपनी
इसके बाद इसने आईआईएम कोलकाता और इस बार आईआईएम कोझिकोड के लिए काम किया। इस कंपनी का टर्नओवर भी बहुत ज्यादा नहीं है। लिहाजा माना जा रहा है कि कंपनी के प्रतिनिधि को किसी ने पैसे का लालच देकर तोड़ा।
कोई मिला है आईआईएम कोझिकोड से भी
इसमें कोचिंग संचालकों की भूमिका और खुद आईआईएम कोझिकोड का कोई भेदिया भी शामिल है।
कैट के फूलप्रूफ सिस्टम को तोड़ने के लिए यही एक अच्छा रास्ता भी था कि जब रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड हो तो उसमें पहले टैम्परिंग कर परसेंटाइल बढ़ा दिए जाएं।
गोरखधंधे का खुला खेल
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) और टॉप बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) में परसेंटाइल बढ़वाने के नाम पर गोरखधंधा करने वालों ने खुला खेल खेला।
विज्ञापनों के माध्यम से कम परसेंटाइल वाले अभ्यर्थियों को एनआरआई व मैनेजमेंट कोटे से दाखिला दिलवाने का झांसा दिया गया। अभ्यर्थियों ने जब संपर्क साधा तो परसेंटाइल बढ़वाने का चारा फेंका गया। शिकार को कोई शक न हो सके या वह मुसीबत न खड़ी कर सके, इसके लिए कुछ फोन नंबर देकर उन पर मिस्ड कॉल करने को कहा गया।
कोचिंग संचालकों पर भी है शक
मिस्ड कॉल के बाद 80 अभ्यर्थी फंसे जिनसे लाखों रुपये की डीलिंग हुई। सूत्रों के मुताबिक इस सारे खेल में कैट की वेबसाइट को मेंटेन करने वाली लखनऊ की कंपनी वेब वेवर्स ने अहम भूमिका निभाई। कुछ कोचिंग संचालकों की भी भूमिका संदेह के घेरे में है।
सेलेक्शन का है चक्कर
रिजल्ट में टैम्परिंग कर परसेंटाइल बढ़ाने के लिए मास्टर डाटा सीडी से चुराया गया। इसमें कोचिंग संचालकों की भी भूमिका संदेह के घेरे में है। क्योंकि कैट के नाम पर कोचिंग चलाने वाले स्टूडेंट से मोटी फीस वसूलते हैं और वह अधिक से अधिक सेलेक्शन दिखाकर अपना रुतबा बढ़ाते हैं।
आईआईएम कोझिकोड के मीडिया सेल के प्रभारी श्रीकुमार ने स्वीकारा कि मोबाइल और टोल फ्री नंबर से अभ्यर्थियों को फांसने की बात सामने आई है लेकिन जांच के बाद ही साफ होगा कि किस तरह सेंधमारी की गई।
अब सब कुछ पुलिस व साइबर क्राइम सेल के पास है। उनका मानना है कि इस खेल में किसी स्टूडेंट के साथ धोखा हुआ जिससे उसने सब पोल खोल दी। क्योंकि पहले खुद आईआईएम कोझिकोड को इसकी जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति ने ही दी। इसके बाद जब जांच की गई तो 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ाने का मामला पकड़ में आ गया।
शुरू हो गई जांच
पुलिस, साइबर क्राइम सेल और फोरेंसिक जांच टीम ने इन सारे पहलुओं पर पड़ताल शुरू कर दी है।
आईआईएम कोझिकोड द्वारा केरल के कुन्नामंगलम पुलिस थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाने के बाद सबसे पहले आईआईएम कोझिकोड के मुख्य कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को सील किया है।
इसमें कैट से जुड़े सभी डाटा मौजूद हैं। रिजल्ट की जो सीडी कैट की वेबसाइट www.catiim.in पर अपलोड करने के लिए लखनऊ की कंपनी वेब वेवर्स को दी गई थी उसे भी कब्जे में ले लिया गया है।