जनपद की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। मनमाना बिजली का बिल वसूलने के बावजूद उपभोक्ताओं को नियमित बिजली आपूर्ति नहीं दी जा रही है जिससे लोगों में रोष है। विद्युत की लचर प्रणाली से लोग अब सड़क पर उतरने का मूड बना रहे हैं। आलम यह कि व्यापार लगभग मंदा पड़ चुका है और दूकानदार भीषण गर्मी में हाथ का पंखा झेलने को विवश हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में बिजली देने का वादा छलावा साबित हो रहा है। जिले में बिजली कटौती की कोई मियाद नहीं रह गई है। ठंड के मौसम में बिजली कटौती का लोगाें को एहसास नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही प्रचंड गर्मी शुरू हुई बिजली कटौती लोगाें को रुलाने लगी। अंधाधुंध बिजली कटौती के बावजूद सरकार के नुमाइंदे विंध्याचल मंडल में पर्याप्त मात्रा में बिजली आपूर्ति किए जाने का खोखला दावा कर रहे हैं।
वर्तमान समय में जनपद के ग्र्रामीण अंचलों में महज तीन घंटे और नगरीय इलाके में आठ घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है, जबकि रोस्टर की बात करें तो ग्रामीण अंचलाें में दस घंटे तथा नगरीय इलाके में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति किए जाने का निर्देश है, लेकिन विभागीय अधिकारी मनमाने तरीके से बिजली का बिल वसूलने के बावजूद आपूर्ति सही ढंग से नहीं करा पा रहे हैं। बिजली की बेहिसाब कटौती से बिजली पर आधारित सभी कार्य ठप रहते हैं। रात्रिकालीन बिजली कटौती से जहां एक ओर लोग चैन की नींद सो नहीं पा रहे हैं, वहीं इलेक्ट्रानिक उपकरण महज शोपीस बन कर रह गए हैं।
बिजली कटौती का कारण विद्युत विभाग के अधिकारियों से पूछने के लिए उपभोक्ता लगातार संपर्क करते रहते हैं, लेकिन अधिकारी फोन तक नहीं उठाते, ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं का महकमे के प्रति आक्रोश पनपता जा रहा है। बिजली की बेहिसाब कटौती को लेकर जनपद के उपभोक्ता कभी भी सड़क पर उतर कर आंदोलन कर सकते हैं।