लालगंज। बल्हिया कला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को व्यास योगेंद्र महाराज ने गजेंद्र, मोक्ष, श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि धरती पर जब-जब अधर्म बढ़ा, तब-तब प्रभु ने अवतार लिया और धर्म की स्थापना की।
कथावाचक योगेंद्र महाराज ने गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए बताया कि कैसे एक अहंकारी हाथी जब मगरमच्छ के चंगुल में फंस गया, तब उसने अपने प्रभु श्रीहरि की शरण ली। गजेंद्र ने भक्ति-भाव से भगवान विष्णु का आह्वान किया तो वे गरुड़ पर सवार होकर पहुंचे और उसे संकट से मुक्त कराया। उन्होंने कहा कि जब अहंकार खत्म होता है और पूर्ण समर्पण का भाव आता है, तभी ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि जब त्रेतायुग में धरती पर अधर्म बढ़ा और राक्षसों का आतंक चरम पर पहुंच गया, तब भगवान विष्णु ने अयोध्या में राजा दशरथ के घर श्रीराम के रूप में जन्म लिया। उनके जन्म से अयोध्या में आनंद की लहर दौड़ गई और नगरवासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाईं। जैसे ही यह प्रसंग सुनाया गया। पंडाल में उपस्थित भक्तों ने जय श्रीराम के जयघोष लगाए। इसी तरह मथुरा में कंस के अत्याचार से जनता त्रस्त हो गई, तब श्रीहरि ने देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। श्रीकृष्ण के जन्म के समय कारागार के द्वार स्वतः खुल गए यमुना की लहरें शांत हो गईं। वसुदेव जी नवजात बालक को टोकरी में लेकर सुरक्षित रूप से गोकुल पहुंचाने में सफल रहे। कथा के दौरान भजनों की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के आयोजक छोटेलाल तिवारी रमादेवी, लालमणि तिवारी,राजेश्वर, अश्वनी तिवारी, विकास धर दूबे आदि उपस्थित रहे।