जिले में गेहूं खरीद शुरु तो हो गई है लेकिन गति नहीं पकड़ पा रही। निर्धारित लक्ष्य तो 64 हजार एमटी का है लेकिन अभी तक महज 607 एमटी गेंहू की खरीद ही हो सकी है। क्रय केेंद्रों पर गेहूं खरीदने के बाद रखने के लिए जगह नहीं है। इसके कारण क्रय केंद्र प्रभारी गेहूं खरीदने से कतरा रहे हैं तो किसान व्यापारियों को मजबूरी में औने पौने दामों पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
जनपद में कहने को तो गेहूं खरीद एक अप्रैल से 53 क्रय केंद्रों पर शुरु हो गई है, लेकिन वह भी कागजों पर ही चल रही है। सूत्रों की मानेें तो अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र खुलना तो दूर बैनर भी नहीं लग सके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं क्रय केंद्र नहीं खुलने से किसान काफी परेशान हैं, जिसके कारण किसानों को अपनी मेहनत से पैदा उपज को औने पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी रतन कुमार शुक्ला के अनुसार विभाग द्वारा 102 किसानों से निर्धारित लक्ष्य 64 हजार एमटी के मुकाबले महज 607 एमटी गेहूं खरीद ही हो सकी है।
जो निर्धारित लक्ष्य का महज .94 प्रतिशत ही है। उन्होंने बताया कि खाद्य विभाग के 11 क्रय केंद्रों पर 13 हजार एमटी के मुकाबले सर्वाधिक 463 एमटी, पीसीएफ द्वारा 22 क्रय केंद्रों पर 19 हजार एमटी के मुकाबले 58 एमटी, यूपी एग्रो के पांच क्रय केंद्रों पर 42 एमटी, और भारतीय खाद्य निगम के तीन क्रय केंद्रों पर निर्धारित सात हजार एमटी के मुकाबले महज 42 एमटी गेहूं खरीद किया गया है। जबकि कर्मचारी कल्याण निगम और सहकारी समिति द्वारा चार-चार तथा नेकाफ के चार क्रय केंद्रों पर अभी तक गेहूं खरीद का श्रीगणेश तक नहीं हो सका है।
सूत्रों की मानें तो विभाग द्वारा किसानों से कम व्यापारियों से ज्यादा गेहूं खरीद किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकारी व्यवस्था समझ से बाहर है।