इसमें स्पष्ट हुआ कि शिकायतकर्ता लक्ष्मी नारायण दूबे ने रुपये की गड्डी लेखपाल कुंवर प्रसाद को दिया। जिसको क्षेत्रीय लेखपाल ने अपने हाथ में लेकर मस्तक चढ़ाया। फिर नोटों को गिनकर अपने पास रख लिया। कहा गया कि प्रथम दृष्टया लेखपाल दोषी पाए जाते हैं। इस कृत्य के तहसील की छवि भी धूमिल होती है। इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।