मां दुर्गा सप्तमी पर विंध्य दरबार में आस्थावानाें ने मत्था टेक कर मंगला कामना किया। विंध्याचल मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन करने के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। क्या छोटे क्या बड़े सभी मां की भक्ति में लीन रहे। बोलो सांचे दरबार की जय, जय मां विंध्यवासिनी आदि मां के गगनभेदी जयघोष से पूरा विंध्यधाम गुंजायमान हो रहा था।
मंगला आरती के उपरांत नारियल-चुनरी सहित गुड़हल फूल का माला और प्रसाद लिए कतार में खड़े श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। विंध्याचल मंदिर की छत पर जहां एक ओर शहनाई और नगाड़े की गूंज के बीच मुंडन संस्कार चलता रहा वहीं दूसरी तरफ आसन पर बैठ कर पूजन-अनुष्ठान करते साधक भक्ति में तल्लीन दिखाई दिए। रविवार को विंध्यधाम में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, जिससे धाम क्षेत्र की सातों गलियां भक्ताें से पटी रहीं। दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थी गंगा में डुबकी लगाने के बाद विंध्यधाम पहुंच कर विधिवत दर्शन-पूजन किए। मंदिर पहुंचे भक्तजन जगत कल्यानी के भव्य स्वरूप का दीदार कर निहाल हो उठे। माता के धाम पहुंचे श्रद्धालुआें ने भी बड़े ही श्रद्धाभाव से मां के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्ताें ने धाम परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया। दर्शनार्थियाें को दर्शन कराने में पुलिस प्रशासन के साथ ही विंध्य पंडा समाज के लोग सेवाकार्य में डटे रहे। भक्ताें की भीड़ को देख विंध्याचल धाम क्षेत्र के दुकानदार काफी खुश नजर आ रहे थे।