मादक द्रव्यों की तस्करी और पशु तस्करी प्रशासनिक अमले की मिली भगत से हो रहा है। पिछले दिनों कुछ पशु तस्कर पकड़े गए, जो पूर्व में भी कई बार जेल जा चुके हैं। उन लोगों ने पुलिस और अधिकारियों की मिलीभगत से पशु तस्करी की बात कबूली। तब पुलिस ने नेताओं को बचाने के लिए अपना दल कमेरावादी के जिलाध्यक्ष श्याम बहादुर पटेल का नाम लेकर फंसा दिया।
श्याम बहादुर पटेल के ग्रामसभा में भी एक सरकारी गोशाला है। जहां बीडीओ, एडीओ पंचायत, गांव के सेक्रेटरी की देख-रेख में गोशाला के केयरटेकर की नियुक्ति होती है। अन्य गोशालाओं के अलावा यहां से भी शिकायतें मिलीं। इसकी जांच जिले के अधिकारियों के देखरेख में होनी चाहिए थी, लेकिन पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उपयोग किया गया।
एफआईआर में नाम नहीं होने पर जिलाध्यक्ष को फंसाया
ग्राम प्रधान और जिलाध्यक्ष को बिना किसी जांच के राजनीतिक षड़यंत्र के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट में नाम न होने के बावजूद फंसाया गया। कहा कि हद तो तब हो गई जब एक मुकदमे में जमानत हो जाने के बाद कहीं अन्यत्र का दूसरा मुकदमा लिख दिया गया। पल्लवी से बात करने पहुंचे एसडीएम सदर गुलाब चंद और सीओ लालगंज अमर बहादुर ने विधायक पल्लवी पटेल से ज्ञापन देने को कहा।
इस पर पल्लवी ने कहा कि ज्ञापन दिया जा चुका है। वह डीएम और एसपी से मिलने के बाद ही यहां से जाएंगी। जब तक डीएम और एसपी नहीं आएंगे, तब तक यहीं बैठी रहेंगी। एक घंटे बाद एडीएम अजय कुमार और एएसपी ऑपरेशन मनीष मिश्रा बात करने पहुंचे। पल्लवी ने उन्हें भी लौटा दिया। सवा पांच बजे डीएम कार्यालय में डॉ. पल्लवी पटेल 12 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल के साथ बात करने पहुंची। इस मौके पर गगन प्रकाश यादव, दिलीप पटेल आदि रहे।
सोने लाल पटेल का नाम बेचकर सत्ता का स्वाद चखने वाले नहीं दबा पाएंगे आंदोलन- डा. पल्लवी पटेल
जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार और पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक एक घंटे वार्ता के बाद अपना दल कमेरावादी के लाेगों ने छह घंटे बाद शाम सात बजे धरना समाप्त किया। अपना दल कमेरावादी की विधायक डा. पल्लवी पटेल ने कहाकि प्रशासन स्वीकार नहीं करता कि कूटरचित कार्यक्रम हो रहा है।
ये वादा कि गया कि जो पहली प्राथमिकी दर्ज की गई। जिसकी बेल प्रक्रिया को रोक दिया गया। वहां पर अगले डेट पर जमानतकर्ता का प्रमाणिकरण पूरा कर दिया जाएगा। साथ ही दूसरी प्राथमिकी में नाम शामिल किया गया है। उसके सारे साक्ष्य जमा कर दिया जाएगा। आश्वासन दिया गया कि आगे कोई कार्रवाई नहीं होगा। पुख्ता तरीके से कह सकते है कि उनके जिलाध्यक्ष 30 वर्ष से जन प्रतिनिधि है। उनकी छवि को धूमिल करने का कार्य किया जा रहा है। राजनीति वही लोग कर रहे हैं, जिनकी हाथ की कठपुतली पुलिस प्रशासन बना है।
सोने लाल पटेल का नाम बेचकर जो खा रहे है। जो यहां पर सत्ता का स्वाद चख रहे है। ऐसे लोग अगर चाहेंगे कि उनके जिलाध्यक्ष को जेल में रखकर उनके हौसले और आंदोलन को खत्म करने की चेष्टा कर रहे है तो ऐसा होगा नहीं। स्प्रिंग को जितना दबाएंगे वह उतना तेज उछाल मारकर वापस आएगा। जिनको पकड़ा गया। उनको मारा गया तो उन्होंने जिलाध्यक्ष का नाम लिया।