मिर्जापुर। कोविड के मरीज बढ़ने पर सबसे ज्यादा आॅक्सीजन और वेंटिलेटर की होती है। इसके बावजूद जिले के अस्पतालों में आॅक्सीजन और वेंटिलेटर की हालत खराब है। पांच में दो आक्सीजन प्लांट और 66 वेंटिलेटर खराब पड़े हुए हैं। सबसे बड़ा आॅक्सीजन प्लांट दो साल के बाद भी चालू नहीं हो सका है। कोविड के समय 84 वेंटिलेटर मंगाए गए थे, जिनमें से 66 खराब हैं। सिर्फ 16 चालू हालत में हैं, लेकिन प्रशिक्षित संचालक और विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण इनका भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। देश में कोविड फिर से दस्तक दे रहा है लेकिन अस्पतालों में बदइंतजामी से संकट उत्पन्न हो सकता है।
मंडलीय अस्पताल में कोविड के समय 300 लीटर, 250 लीटर और फिर 960 लीटर का आक्सीजन प्लांट लगाया गया था। बाद में 960 लीटर वाला आॅक्सीजन प्लांट महिला अस्पताल से दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन कभी इसका संचालन नहीं किया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तीनों आक्सीजन प्लांट क्रियाशील हैं। कोविड के दूसरी लहर में आॅक्सीजन की कर्मी से कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी।
इसको देखते हुए 2023 में मंडलीय अस्पताल में एक करोड़ से 20 हजार लीटर का आॅक्सीजन प्लांट लगाया गया था लेकिन अभी तक इसका संचालन शुरू नहीं किया गया। अब तक प्लांट के संचालन के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। विंध्याचल सीएचसी में भी आॅक्सजीन प्लांट लगा था, जो तकनीकी कारण से संचालित नहीं हो रहा है। वहीं, 84 वेंटिलेटर मंगाए गए थे। इनमें से 66 वेंटिलेटर खराब हैं।