उग उग ए सूरज देव भइल अरघ के बेर... जैसी गीतों को गाकर कमर तक गंगा में खड़ी व्रती महिलाओं ने बुधवार को तड़के सूर्योपासना कीं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि बुधवार को व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा पूरी की।
उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाएं परिवार के सदस्यों के साथ भोर से ही गाजे-बाजे के साथ गंगा घाटों पर पहुंच गई थीं। महिलाओं ने विधि विधान पूर्वक सूर्य भगवान का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्घि की कामना कीं। गंगा घाटों पर भोर से ही अर्घ्य देने के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा।
सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देेने के बाद पूजन-अर्चन के साथ बुधवार को संपन्न हो गया। गंगा घाटों पर सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाओं का रेला उमड़ पड़ा। गंगा जल में खड़ी व्रती महिलाओं तक जैसे ही भगवान सूर्यदेव की पहली किरण पहुंची अर्घ्य देने का क्रम शुरू हो गया।
महिलाएं रात्रि जागरण के बाद भोर में ही गंगा घाटों पर सूर्य को अर्घ्य देने के ञलिए गाजे-बाजे के साथ पहुंच गई थीं। भोर में पांच बजते-बजते गंगा घाट महिलाओं से पट गए थे। भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए नगर क्षेत्र के समस्त गंगा घाटों पर आस्था का समंदर उमड़ पड़ा।
सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाओं सहित उनके परिवार के सदस्य भी गाजे-बाजे के साथ सिर पर दउरा में पूजन सामग्रियां लेकर गंगा घाटों पर पहुंचे थे। गंगा घाटों पर पहुुंची व्रती महिलाओं ने वेदी को गंगा जल से धोया और गन्ने को खड़ा कर दीप जला कर विधिवत पूर्वक पूजन-अर्चन किया।
सूर्योदय के पूर्व ही व्रती महिलाएं पानी में सूप लेकर खड़ी हो गई थीं। सूर्य की पहली किरण फूटते ही दूध व गंगा जल से अर्घ्य देने का सिलसिला शुरू हो गया। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महिलाओं ने व्रत पूर्ण कर अपने बड़ों से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। नगर के समस्त गंगा घाटों पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे।