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सात फेरे से पहले दस झमेले

Thu, 24 Nov 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
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कछवां स्थित इलाहाबाद बैक के बाहर लगी ग्राहकों की कतार ।
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नोटबंदी के चलते सात फेरे लेने के लिए लोगों को काफी झमेले झेलने पड़ रहे हैं। शादी के लिए  मिलने वाली ढाई लाख की धनराशि मिलनी अब टेढ़ी खीर साबित हो रही है। पैसा लेने के लिए ग्राहकों के सामने इतनी शर्तें रख दी गई हैं, कि उनको पूरा करना शादी वाले घर के सदस्यों को भारी पड़ रहा है। बैंकों  में शगुन का कार्ड लेकर गए ग्राहकों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। वित्त मंत्री के फरमान से लोगों के चेहरे खुशी से खिल  उठे थे और लोग काफी राहत महसूस करने लगे थे, लेकिन बुधवार को बैंकों में पहुंचे ग्राहकों को बैरंग ही लौटना पड़ा। 
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नोटबंदी के 15 वें दिन के बाद शादी वाले परिवारों में भी शहनाई की गूंज सुनिश्चित करने के लिए शादी वाले घरों के सदस्यों को बार-बार बैंक का चक्कर लगाना पड़ रहा है, बाजवूद इसके उनके हाथ में पैसे नहीं आ पा रहे हैं। नोटबंदी से शादी वाले घरों में काफी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के आदेश के बाद भी शादी के लिए बैंकों से ढाई लाख रुपये नहीं दिए जा रहे हैं। उनकी शर्तें इतनी झमेले वाली हैं कि सात फेरों को पूरा करने के लिए सैकड़ो चक्कर बैंक के लगाने पड़ रहे हैं, बावजूद इसके भी अपना ही पैसा नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में लोग रिश्तेदारों, दोस्तों व शुभचिंतकों से किसी प्रकार धन की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।

ढाई लाख रुपये के लिए कुछ शर्तों का प्रावधान किया गया हैं, जिन्हें पूर्ण करना सबके बस की बात नहीं है। यदि  हाल यही रहा तो  बेेटे-बेटियों के हाथ पीले होने का अरमान धरा का धरा  रह जाएगा। शहर से लेकर गांव गांव तक जिनके घरों में शादी पड़ी है, उनको पैसे के लिए क्या क्या नहीं करना पड़ रहा है। यहां तक कि उनके खास चाहने वाले भी हाथ खड़े कर दे रहे हैं, ऐसी स्थिति में उनको कुछ सूझ नही रहा कि आखिर बारातियों का स्वागत-सत्कार आदि कैसे किया जाएगा, जिसको लेकर शादी वाले घरों में मायूसी छाई हुई है। शादी के लिए बैंक से ढाई लाख रुपये तो जरूर मिलेंगे, लेकिन तय फार्मेट भरने के बाद ही निश्चित समय पर दिया जाएगा, ऐसे में ग्राहक कई दिनों से बैंकों का चक्कर काटने को मजबूर हैं। 
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