किसी की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार कीजिए और उसके बाद वो इंसान आपको घर पर जीवित मिल जाए तो आप भौचक रह जाएंगे। बुधवार की रात मड़िहान थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया। बीते दिनों सड़क दुर्घटना में अज्ञात की व्यक्ति मौत होने के बाद शिनाख्त कर परिजनों ने बुधवार को पोस्टमार्टम कराकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार कर परिजन जब रात में घर आए तो वो व्यक्ति जीवित मिला। छानबीन के बाद पुलिस ने मृतक के असली परिजनों का पता लगाया।
क्षेत्र के कोन भरूहवा गांव सब्जी मंडी के पास 12 मई को अज्ञात वाहन के धक्के से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पुलिस शव की शिनाख्त में जुटी थी। सोशल मीडिया पर वायरल मृतक की फोटो देख भवानीपुर गांव निवासी एक परिवार के लोगों ने पुलिस के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शिनाख्त मुन्नीलाल (42) पुत्र हरपत के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव पहचान करने वाले परिजनों को सौंप दिया। बुधवार की रात अंतिम संस्कार करने के बाद जब परिवार के लोग घर लौटे तो वहां लोगों की भीड़ लगी हुई थी। भीड़ के बीच में बैठे मुन्नीलाल को बात करते हुए देख कर अंतिम संस्कार कर लौटे हतप्रभ रह गए। मुन्नीलाल को जिंदा पाकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था, परंतु लोगों को चिंता सताने लगी कि जिसका अंतिम संस्कार उन्होंने किया है, वो शव किसका था। मुन्नी लाल के भाइयों ने बताया कि मृतक के चेहरे पर चोट लगा था। चेहरा पूरी तरह से सूज गया था। चेहरा व हुलिया बिल्कुल मुन्नीलाल के जैसा ही था। जिससे उसे अपना भाई समझकर अंतिम संस्कार कर दिया। मुन्नी लाल ने बताया कि लगभग एक महीने से वह अपने घर से बाहर गया हुआ था। अपने रिश्तेदारों के यहां चुनार में रह रहा था। उसके पास मोबाइल फोन नहीं था। इसके चलते अपने परिजनों को बता नहीं सका। चौकी प्रभारी ने बताया कि मुन्नीलाल को बुलाकर पूछताछ की जा रही है।
उधर, जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया, उसकी भी बृहस्पतिवार को सुबह पहचान हो गई। पहचान पकौड़ी कोल पुत्र राम जियावन निवासी चमेर बंधा थाना चकरघट्टा जिला चंदौली के रूप में हुई। मृतक की पत्नी ने अपने परिजनों व प्रधान के साथ राजगढ़ पुलिस चौकी पहुंच कर फोटो से पहचान की। बताया कि पकौड़ी कोल अपने घर से सक्तेशगढ़ स्थित ससुराल जाने के लिए निकला था। थानाध्यक्ष शैलेश राय ने बताया कि हादसे में मृत युवक की शिनाख्त करने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया, परंतु वह जिंदा निकला। मृतक के असली परिजनों ने आकर उसकी शिनाख्त की है। जिन्होंने उसका अंतिम संस्कार किया, उन्होंने पहचान करने में गलती की।