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फुहारों ने बढ़ाई ठंड, निकले कंबल रजाई

Thu, 29 Oct 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
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पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में आए पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बदलने का असर पूर्वांचल में दिखना शुरू हो गया है। मिर्जापुर जिले में भी बुधवार को मौसम ने रुख बदला। दोपहर तक हल्की बदली थोड़ी ही देर में घनी हो गई। दो बजेे तक बूंदाबांदी शुरू हो गई, जो कि रात में भी जारी रही। हल्की बारिश के चलते तापमान गिरा।
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शाम को लोग गर्म पकड़े पहने नजर आए। रजाई और कंबल भी लोगों ने निकाल लिए। उधर, बारिश से कुछ किसानों में निराशा है तो कुछ खुश हैं। किसानों का मानना है कि अगर यह बारिश कुछ दिन पहले शुरू हुई होती तो धान की सूखती फसल को बचाया जा सकता था। साथ ही उत्पादन भी बढ़ जाती।


अब कोई फायदा नहीं है। वहीं ज्वार, बाजरा, अरहर की खेती करने वाले किसान इससे खुश हैं। दूसरी ओर किसानों को ओले का डर भी सता रहा है। किसानों ने बताया कि अगर ओले पड़े तो अगैती धान का बालियां गिर जाएंगी।
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बुधवार को दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट लिया। धूप खत्म हुई और घटाएं घिर आईं।


थोड़ी ही देर में फुहारें पड़ने लगीं। फुहारों ने मौसम को ठंडा कर दिया। बिना तैयारी के बाजार में निकले लोग भीगकर  लौटे। शाम को जल्द ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया। दूकानें भी जल्दी ही बंद हो गईं। उधर जिन इलाकों में सीवर लाइन बिछाने के लिए गड्ढे खोदे गए थे, वहां फिसलन की स्थिति पैदा हो गई। महुवरिया, रतनगंज, रोडवेज आदि इलाकों में फिसलन होने के कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।


मौसम ठंडा होते ही लोगों ने बच्चों के लिए स्वेटर और जैकेट बाहर निकाल लिए। ठंड भरी रातों से निपटने के लिए रजाई और कंबल भी निकाल लिए गए। घरों में कूलर तो पहले ही बंद हो चुके थे, बारिश ने पंखों के चलने पर भी विराम लगा दिया।


लोगों का मानना है कि यदि यही मौसम लगातार कुछ दिन तक जारी रहता है तो दीपावली की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश थोड़ी तेज होती तो पौधों के जड़ तक पानी पहुंचता लेकिन फुहारों के पड़ने से मात्र सब्जियों की फसलों में थोड़ी बहुत ताजगी आ पाएगी।


किसानों का मानना है कि यदि यही बारिश कुछ दिन पहले थोड़ी तेजी के साथ आती तो वह धान की फसल के लिए संजीवनी होती। इस बारिश से न तो फसलों को कोई नुकसान हुआ है और न ही फायदा। पानी ठीकठाक बरसता तो ज्वार और बाजरा को भी लाभ होता लेकिन अब  यह फसल कटने के कगार पर पहुंच चुकी है।
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