कछवां। बजहा गांव स्थित स्वामी रामानुजाचार्य आश्रम में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि ब्रह्मचारी देवनायकाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, कंस वध और रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि अत्याचार और अहंकार चाहे कितने भी शक्तिशाली हों, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने अनन्य भक्ति, अटूट विश्वास और समर्पण का महत्व बताया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार, सदाचार और उच्च जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी गई।