मिर्जापुर। विंध्याचल में अवैध तरीके से बेचे जाने वाली हेरोइन के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल होता है। हेरोइन का नशा करने वाले मोबाइल फोन या अड्डे पर पहुंच कर एक काड़ी, दो काड़ी के कोड वर्ड का इस्तेमाल कर हेरोइन मांगते हैं। इसे उपलब्ध कराने वाले कोड वर्ड के हिसाब से पुड़िया में रखा सामान ग्राहक को देकर हट जाता है।
विंध्याचल के बावली चौराहा, पटेंगरा नाला, अमरावती चौराहा, पकरीतर आदि स्थानों पर हेरोइन की पुड़िया मिलती है। विंध्याचल में दो तरह की हेरोइन आती है। इसमें सफेद और भूरे रंंग की हेरोइन होती है। एक ही सप्लायर दोनों प्रकार की हेरोइन को लाता है। सफेद हेरोइन की खपत ज्यादा है। भूरे रंग वाली हेरोइन महंगी बिकती है। हेरोइन का नशा करने वाले अड्डे पर पहुंच कर इधर-उधर मंडराते रहते हैं। बेचने वाला उनके पास पहुंचता है। खरीदार कोड भाषा का इस्तेमाल करते हुए एक काड़ी या इससे अधिक की मांग करता है। उस हिसाब से बेचने वाला पुड़िया निकालकर दे देता है। एक काड़ी की एक पुड़िया होती है। सफेद वाली हेरोइन की कीमत दो से तीन सौ रुपये और भूरे रंग वाली हेरोइन की कीमत चार से पांच सौ रुपये तक होती है। दाम घटता-बढ़ता रहता है। यहां से थोक के रूप में हेरोइन चुनार, कटरा कोतवाली और शहर कोतवाली क्षेत्रों में भी आता है। केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल कुछ दिन पहले ही मारपीट में घायल अपना दल एस कार्यकर्ता को देखने अस्पताल पहुंची थीं। वहां उन्होंने मेडिकल न होने तथा आरोपिपयों पर कार्रवाई न होने पर अधिकारियों से कड़ी नाराजगी जताई थी। उस दौरान उन्होंने विध्याचल पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वहां की पुलिस को ड्रग्स बिकवाने से फुर्सत नहीं है। इसके बाद एक तीर्थ पुरोहित ने भी हेरोइन समेत अन्य मादक पदार्थों की बिक्री कराने में पुलिस पर सांठ-गांठ का आरोप लगाया था, पर अब तक पुलिस की ओर से मादक पदार्थ बेचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने मामले में जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है।