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दस साल पहले जहां था कूड़ाघर, वहां तन गई बिल्डिंग

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हाल के आठ से 10 वर्षों में देखते-देखते नगर में दर्जनों कालोनियों का जाल फैल गया। कुछ समय पूर्व तक जहां कूड़े का ढेर या तालाब तथा बच्चों के खेलने के लिए पार्क थे, वहां अब ऊंची- ऊंची इमारतें दिखाई दे रही हैं। कई जगह तालाब की जमीन पर कालोनी बसा दी गई और लोगों ने मकान भी बनवा लिया। नगर में कालोनियों के हो रहे अनियंत्रित विकास से विकास प्राधिकरण की कार्ययोजना और सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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फतहां के आसपास तथा तहसील तिराहे के बाद भरूहना रोड पर 10 वर्ष पूर्व एकदम सन्नाटा रहता था। कमोवेश यही स्थिति शास्त्री पुल के आगे विंध्याचल रोड पर भी थी। लेकिन अब इन सभी जगहों पर घनी आबादी हो गई है। यहां तक कि इन क्षेत्रों में जो कृषि योग्य जमीन थी, वहां भी आज कालोनियां दिख रही हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश कालोनियां मिर्जापुर- विंध्याचल का ले आउट विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं कराया गया है। जगह की कमी और अच्छा मकान बनवाने की होड़ में पूरे नगर में अनियोजित विकास होता चला गया। यही वजह है कि जहां कुछ वर्ष पहले हरियाली दिखाई देती थी, अब वहां भी कंक्रीट के जंगल दिखाई दे रहे हैं। नगर में पार्क और मैदान के लिए भी जमीन नहीं मिल रही है। गंगा के किनारों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। उधर, अवैध कालोनियाें का हाल यह है कि वहां न तो नालियों का पता है और न ही सीवर लाइन की व्यवस्था है। कहीं-कहीं दिखावा के लिए नालियां जरूर कुछ दूर तक खोद दी गई हैं। जल निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण नालियां चोक हो गई हैं। गंदगी और दुर्गंध से आसपास के लोग परेशान हैं। उधर, नगर में कब्जा एवं अतिक्रमण का सिलसिला तेज हो गया है। तमाम लोगों ने सरकारी जमीन या संस्थाओं की जमीन पर भी भवन बनवा लिए हैं। भटवा की पोखरी में केबी कॉलेज की जमीन तथा रमई पट्टी में एएसजे इंटर कॉलेज की जमीन हुए निर्माण को उदाहरण के रूप में लिया जा सकता है। भटवा की पोखरी में महाविद्यालय की छह बीघा जमीन है। इन सभी जगहों पर अब मकान बने हुए हैं। हालांकि केबी कॉलेज की जमीन के लिए डिक्री हो चुकी है और प्रशासन को अतिक्रमण हटवाना है। यह स्थिति तब है जबकि इस महाविद्यालय के प्राधिकृत नियंत्रक मुख्य विकास अधिकारी हैं। इसी तरह एएसजे इंटर कॉलेज की रमईपट्टी तिराहे पर छह बिस्वा जमीन है। इन पर भी अतिक्रमण बताया जा रहा है। इस कॉलेज के पदेन प्रबंधक जिलाधिकारी हैं। इसके बाद भी इन जगहों से कब्जा नहीं हटाया जा सका है। इसी के साथ तरकापुर स्थित एक अन्य इंटर कॉलेज के खेल के मैदान पर भी अतिक्रमण की बात कही जा रही है। सिटी मजिस्ट्रेट व मिर्जापुर-विंध्याचल विकास प्राधिकरण के प्रभारी विनय कुमार सिंह का कहना है कि अवैध कब्जा या अतिक्रमण, दोनों ही स्थिति में कार्रवाई तय है। प्रशासन नियमानुसार अवैध निर्माण को अवश्य ही ध्वस्त कराएगा।
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