घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़े की गूंज के साथ चहुंओर मां का जयघोष। नारियल-चुनरी के साथ गुड़हल फूल का माला व प्रसाद लिए कतार में खड़े श्रद्धालु। मंदिर के छत पर शहनाई व नगाड़े की गूंज के बीच मुंडन संस्कार तथा आसन पर बैठकर पूजन-अनुष्ठान करते साधक। मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से पटी सातों गलियां। यह नजारा चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी को विंध्यधाम का रहा।
वासंतिक नवरात्र की महाअष्टमी पर अदिशक्ति मां विंध्यवासिनी के दरबार में करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने मत्था टेक कर मंगल कामना किया। अन्य दिनाें की अपेक्षा महाअष्टमी पर माता के धाम में दर्शन-पूजन करने के लिए नर-नारियाें का तांता लगा रहा। क्या छोटे क्या बड़े सभी मां की भक्ति में लीन रहे। बोलो सांचे दरबार की जय, जय मां विंध्यवासिनी, जै माता दी, बोलो पहाड़ावाली की जय आदि मां के गगनभेदी जयघोष से पूरा विंध्यधाम गुंजायमान हो रहा था। देश के कोने-कोने से पहुंचे आस्थावानों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद विंध्यधाम पहुंच कर विधिवत दर्शन-पूजन किया। मंदिर पहुंचे भक्तजन जगत कल्यानी के भव्य स्वरूप का दीदार कर निहाल हो उठे। विंध्यधाम क्षेत्र की समस्त गलियाें में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। माता के धाम पहुंचे व्रती नर-नारियाें ने भी बड़े ही श्रद्धाभाव से विंध्य दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्ताें ने धाम परिसर में विराजमान मां काली, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, मां शीतला सहित श्री पंचमुखी महादेव जी, बटुक भैरव एवं दक्षिणमुखी हनुमान जी के भव्य स्वरूप का दर्शन कर अभीभूत हो गए। चिलचिलाती धूप की परवाह किए बगैर मंदिर पहुंचे नर-नारियाें ने बड़े ही श्रद्धाभाव से जगत जननी मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में मत्था टेक सुख-समृद्धि के लिए कामना किया। महाअष्टमी तिथि पर विंध्यधाम में उमड़े दर्शनार्थियाें को दर्शन कराने में पुलिस व पीएसी के साथ ही श्री विंध्य पंडा समाज एवं स्काउट-गाइड मुस्तैदी के साथ सेवाकार्य में डटे रहे