गंगा जमुनी तहजीब के पोषक संत कासिम सुलेमानी की गंगा तट पर मौजूद मजार पर लगने वाला चुनार का प्रसिद्ध दरगाह शरीफ का मेला गुरुवार को धूमधाम से शुरू हुआ।
इस मेले में हर वर्ग और धर्म के लोग समान रूप से पहुंचते हैं।
चैत माह के तीन गुरूवार को लगने वाले इस मेले में देश के कोने कोने से आए बाबा के भक्तों ने अपनी मन्नतें मांगी तो वहीं मुराद पूरी होने की खुशी में बाबा के मजार पर चादरें चढ़ाई और फातिहा पढ़ी।
मन्नत मांगने वालों ने अपनी दरख्वास्त दरगाह में बने खूंटी पर धागों में बांध कर लगाई।पालिकाध्यक्ष हसीना बेगम ने बताया कि पालिका प्रशासन की ओर से मेले में आने वाले भक्तों की सुविधा हेतु सहायता शिविर व स्वास्थ्य शिविर का संचालन किया जा रहा है।
जिसके माध्यम से अपने परिवारीजनों से बिछुड़े बच्चों और उनके परिवारीजनों से मिलाने का काम किया गया।
अनेक स्वयंसेवी संगठनों ने मेले में आने वाले भक्तों को गर्मी से निजात दिलाने हेतु ठंडी शर्बत पिलाई। मेला परिसर की सुरक्षा हेतु स्थानीय पुलिस ने पुख्ता प्रबंध किया है।
पीएसी और पुलिस के जवान 24 घंटे मेला क्षेत्र में चक्रमण करते नजर आए। यहां आने वाले भक्तों की सुविधा हेतु नगरपालिका परिषद की ओर से परिसर की साफ सफाई और कीटनाशक का छिड़काव किया गया है और पेयजल हेतु टैंकर की व्यवस्था की गई है। मेला परिसर में लगे खानपान की दुकानों पर भक्तों की भारी भीड़ रही।
बच्चों के मनोरंजन के लिए लगे झूले और अन्य खेल की स्टाल लगे रहे। खलीफा सज्जादानशींन दरगाहशरीफ हाजी अर्ताउरहमान ने बताया कि यह मेला विगत चार सौ वर्षाें से अधिक समय से लगता चला आ रहा है।
जिसमें हर वर्ग के भक्त बाबा की दरगाह में आकर अपने मन्नतें मांगते है। बताया कि बादशाह अकबर के शासन काल में मुगलिया हुकूमत के दौरान बादशाही की खिलाफत करने पर संत कासिम सुलेमानी को चुनार दुर्ग में नजरबंद किया गया था।
संत की नेकनीयती और अल्लाहताला से लगी उनकी लौ को देख बादशाह ने उनसे माफी मांगी और उन्हें रिहा कर दिया। जिसके बाद बाबा ने अपने रहने के लिए गंगा किनारे का यह स्थान चुनार जहां दरगाह मौजूद है।