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सड़कों पर सजी दुकान, अतिक्रमण से सांसत में जान

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मिर्जापुर। पहले ही अतिक्रमण से सिकुड़ीं शहर की सड़कों पर अब मनमानी होने लगी है। ठेले-खोमचे और अस्थायी दुकानों के अलावा स्थायी दुकानदारों ने भी लबे रोड दुकानें सजाकर कब्जा जमा लिया है। इससे सड़कों पर जाम लगने लगा है। शहर में 10 मिनट की दूरी तय करने में लगभग एक घंटे तक का समय लग जा रहा है।
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शहर की सड़कें पहले से ही संकरी हैं। पटरियों पर दुकानदारों का कब्जा है। पटरियों पर ठेला, खोमचा, रेहड़ी वालों के अतिरिक्त स्थायी दुकानदारों ने भी पटरियों तक कब्जा किया हुआ है। पटरी पर बोर्ड, होर्डिंग अथवा अन्य प्रचार सामग्री से पटरियों पर आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। सड़कों पर पैदल चलने वाले राहगीर भी सांसत में रहते हैं। उनका कहना है कि सड़कों पर दुकानें इस कदर सजाई गईं हैं कि आवागमन के लिए जगह ही नहीं बची। खास बात यह कि यह सब कुछ सामने हो रहा है, लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है। प्रशासन अभियान के नाम पर महज खानापूर्ति करता है। अतिक्रमण हटाने के थोड़े समय बाद ही स्थिति फिर जस की तस हो जाती है।
अतिक्रमण से लग रहा जाम
नगर में स्टेशन रोड, मुकेरी बाजार, लाल डिग्गी, रामबाग, घंटाघर, रमईपट्टी, सिविल लाइन तिराहा और टटहाई रोड पर अक्सर जाम लगता है। इसका सीधा कारण अतिक्रमण है। घंटा घर में तो रेडीमेड कपड़ों की एक दुुकान के सामने वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इसी प्रकार साधवाड़ा रोड पर एक निजी क्लीनिक के कारण वाहनों की कतारें लोगों के घरों के आगे तक लग जाती हैं। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कोई ऐसा दिन नहीं जाता, जब कोई विवाद न होता हो।
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लचर रवैया बन रहा कारण
नगर में अतिक्रमण के बढ़ने का मुख्य कारण प्रशासन का लचर रवैया है। अतिक्रमण हटाने के लिए नगर पालिका को निर्देश दे दिया जाता है। जब नगर पालिका की टीम पहुंचती है तो मारपीट की नौबत आ जाती है। कभी-कभी मजिस्ट्रेट रहते हैं तो पुलिस बल भी रहता है। नहीं तो बिना पुलिस बल के क्या हो सकता है, यह समझना कठिन नहीं है। एक दिन अभियान चलेगा तो दूसरे दिन उसी स्थान पर अतिक्रमणकारी फिर से डट जाते हैं। यदि एक बार पूरे नगर में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाए और उसकी वीडियो रिकार्डिंग कराकर पुन: अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तो कोई कारण नहीं कि अतिक्रमण बंद न हो जाए।
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