शनिवार की सुबह घने कोहरे की चादर और दिन भर बूंदाबांदी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। सुबह से दोपहर बाद तक भगवान भाष्कर के दर्शन न दिए जाने से गलन बरकरार रही।
घने कोहरे की चादर के बीच रिमझिम पड़ फुहार के चलते प्रमुख बाजाराें और सड़काें पर सन्नाटा पसरा रहा। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए नगर में जगह-जगह लोग अलाव तापते देखे गए।
नववर्ष के प्रथम दिन से मौसम का मिजाज बदलने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। शीतलहर के चलते जिले के शिक्षण संस्थानों के बंद होने से बच्चों को तो राहत मिल रही है, लेकिन मौसम खराब होने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गई है।
शनिवार की सुबह घने कोहरे की चादर से पूरा नगर लिपटा हुआ नजर आया, वहीं रूक-रूककर हो रही बूंदाबांदी होने से लोगाें ने भींगते हुए अपने-अपने कार्य किए।
बारिश से कई इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति पैदा हो जाने से लोगों को कीचड़ और पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा, जिससे लोगाें को काफी दिक्कताें का सामना करना पड़ा।