अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों का एक दल शुक्रवार को विकास खंड के भदावल और पिड़खिड़ गांव में पहुंचा। वैज्ञानिकों के दल ने गांव में गेहूं की फसल का निरीक्षण किया। कृषि वैज्ञानिक आयरन युक्त गेहूं की पैदावार बढ़ाने पर शोध कर रहे हैं। साथ ही नई प्रजाति बीएचयू तीन और छह की खेती करने पर बल दिया, जिसमें आयरन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
अंतरराष्ट्रीय समिति के टीम डिप्टी डायरेक्टर ओल्फ गैंग फाइफर के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के दल ने गेहूं की पैदावार का निरीक्षण किया। हार्वेस्ट प्लस समिति के तत्वावधान में गेहूं में आयरन और जिंक के परीक्षण का कार्य चल रहा है। समिति के सदस्य फाइफर ने बताया कि गेहूं की उपज बढ़ाने के लिए पूर्वांचल में 71 जगहों पर 12 प्रजातियों पर विशेष परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों का प्रयास चल रहा है कि नवीनतम प्रजाति में इतना आयरन उपलब्ध हो कि उन्हें अलग से आयरन नहीं खाना पड़े। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 तक लगभग 180 लाख किसानों के घर में ऐसा बीज पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष पूरे विश्व में 25 लाख किसानों को गेहूं का बीज वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। बीएचयू के कृषि वैज्ञानिक हरमेंदर मिश्र ने बताया कि किसानों को बीएचयू तीन और बीएचयू छह बीज की प्रजाति का वितरण उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को किया गया है। जिसका लाभ किसान अधिक पैदावार कर उठा रहे हैं।
डा. विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि जो भी किसान इस बीज का प्रयोग करेंगा, वह किसान अगले वर्ष दो किसानों को दस-दस किग्रा बीज नि:शुल्क प्रदान करेंगा। इस अवसर पर डा. बी अरुण, डा. छवि तिवारी, किसान हरवंश सिंह, रमेश सिंह, रवि प्रकाश सिंह, जगतंबा सिंह आदि शामिल रहे।