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सावन मास: जलाभिषेक के लिए बदेवरानाथ में उमड़ता है कांवडियों का रेला

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सावन में मिर्जापुर जनपद के जिगना क्षेत्र स्थित बदेवरा चौबे में स्थित प्राचीन प्रसिद्ध शिव मंदिर में बाबा बदेवरानाथ के जलाभिषेक के लिए कांवड़ियों का रेला उमड़ता हैं। मंदिर निर्माण के बारे में किसी को स्पष्ट जानकारी तो नहीं है पर मुख्य पुजारी बाबा शारदा गिरी महाराज के अनुसार मंदिर लगभग छह सौ साल पुराना है।श्
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मान्यता है कि बाबा बदेवरानाथ के दर्शन से गठिया-बतास जैसे रोगों से छुटकारा मिलता है। मंदिर के पुजारी बाबा महेंद्र गिरी ने बताया कि सावन मास में भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ग्राम प्रधान माहेश्वरी उपाध्याय ने कहा कि सफाई, पेयजल व प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। बताया कि भगवान शिव की कृपा से यहां गठिया, बतास के असाध्य रोगी दर्शन के बाद भस्म लगाने से ठीक हो जाते हैं। वैसे मंदिर पर प्रत्येक त्रयोदशी को मेला लगता है। दर्शन करने के लिए प्रतिदिन भक्त आते हैं। सावन मास मेें एक माह तक यहां भजन, कीर्तन व भंडारा का आयोजन होता है।
प्रयागराज से यहां पहुंचता है कांवड़ियों का रेला
जिगना। सावन महिनें में प्रत्येक सोमवार को प्रयागराज से भी कांवडियों का जत्था बाबा बदेवरानाथ के जलाभिषेक के लिए पहुंचता है। इसके अलावा क्षेत्र के पश्चिम वाहिनी गंगाघाट, हरगढ़, गोगांव, खैरा, मिश्रपुर, नगवासी, दुगौली, कोठरा, डंगहर, गौरा, भिलगौर, चेहरा, काशीसरपत्ती, चड़ैचा, नीबी गहरवार व नौगांव सहित अन्य घाटो से भोर से ही भक्त गंगा स्नान कर कांवड़ में गंगा जल लेकर बाबा बदेवरानाथ धाम पहुंचते हैं।
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गंगाघाटों पर अव्यवस्था का बोलबाला
सावन मास में गंगाघाटों पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहता है। पककाघाट न होने से कांवड़ियों को कीचड़ व गंदगी का सामना करना पड़ता है। प्रकाश व्यवस्था न होने से अंधेरे हर समय चोर और उचक्को का खतरा बना रहता है। हरगढ़ व नीबी में पक्का घाट तो जरूर हैं, लेकिन जगह होने से श्रद्धालु परेशान रहते हैं। किसी भी घाट पर सुरक्षा व्यवस्था न होने से दहशत का माहौल बना रहता है। क्षेत्रवासियों ने गंगा घाटो पर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखे जाने की मांग की है।
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