नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अगस्त माह सन् 1939 में लालगंज में एक बड़ी सभा
कर आजादी की अलख जगाई थी। यहां के आजादी के दीवानों की सक्रियता ने देश के
नायक नेताजी को कलकत्ता से यहां आने को मजबूर कर दिया था।
जनसभा में
निरक्षर ग्रामीणों की बड़ी हिस्सेदारी देख नेताजी ने उस समय कार्यक्रम के
आयोजक शिवमूर्ति दूबे से पूछा था कि गांवों में स्वतंत्रता की इतनी तेज
आंधी क्यों है, तो उन्होंने कहा था कि अब देश जाग चुका है अंग्रेजों को
भारत छोड़ना होगा।
आजादी के आंदोलन में जनपद के उपरौध क्षेत्र के
ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लालगंज स्थित बापू उपरौध इंटर
कालेज परिसर में सुभाष बाबू ने सन् 1939 में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया
था। उस समय उपरौध क्षेत्र के शिवमूर्ति दूबे के नेतृत्व में यहां
स्वतंत्रता आंदोलन ने जोर पकड़ लिया था।।
स्वतंत्रता के प्रति एकजुटता ने
मिर्जापुर जिले की भी चर्चा होने लगी थी। आजादी की लड़ाई में उपरौध
क्षेत्र के दर्जनों युवा जेल भी जा चुके थे।
देश के युवाओं के चहेते नेताजी
सुभाष चंद्र बोस को जानकारी मिली की मिर्जापुर जिले के उपरौध क्षेत्र के
लालगंज की धरती पर सोनभद्र तक के आदिवासी एकजुट होकर स्वतंत्रता आंदोलन की
चिंगारी जला रखे हैं
तब ग्रामीण जनता का मनोबल ऊंचा करने के लिए नेताजी
अगस्त माह सन् 1939 में यहां कलकत्ता से ट्रेन से आए और मिर्जापुर रेलवे
स्टेशन पर उतरे, जहां आजादी के दिवानों ने सुभाष चंद्र बोस का भव्य स्वागत
किया था।
शिवमूर्ति दूबे ने नेताजी को लालगंज तक पहुंचने की व्यवस्था महंत
शिवाला के इक्के से किया था,सन् 1939 के अगस्त माह, दिन मंगलवार को सुभाष
चंद्र बोस ने जनसभा को संबोधित किया। इतिहास की वह घटना आज भी यहां को
लोगों से सुनी जाती है।