चुनार राजकीय महाविद्यालय में आयोजित लोकगीतों के कार्यशाला में छात्र छात्राओं को प्रशिक्षण देते
चुनार। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्राम सिंह राजकीय महाविद्यालय में पूर्वी लोकगीत : इतिहास, समाज और संगीत (मिर्जापुर के विशेष संदर्भ में) विषयक कार्यशाला के तीसरे दिन छात्राओं को चैती व गंगा दशहरा गीतों का प्रशिक्षण दिया गया।
शुभारंभ प्राचार्य डॉ. माधवी शुक्ला ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि संगीत मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मन को शांति, आनंद और ऊर्जा प्रदान करता है। मुख्य प्रशिक्षक प्रो. संगीता सिंह, वाद्य विभाग, संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने कहा कि बच्चों के बौद्धिक और भावनात्मक विकास में संगीत सहायक होता है। उनके शोध छात्र प्रिया मिश्रा, श्रेया मिश्रा, सुधीर कुमार गौतम, हिमांशु वर पुजारी एवं सुहासिनी शर्मा ने विद्यार्थियों को विभिन्न लोकगीतों जैसे, एही ठईयां मोतिया हेरा गईलें रामा और लहर-लहर लहराए गंगा तोरी अमृत धारा का अभ्यास कराया ।
संचालन डॉ. रीता मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम की संयोजक भातखंडे कल्चरल प्रभारी प्रो. कुसुम लता ने प्रस्तुत किया। कार्यशाला में डॉ. संकठा प्रसाद सोनकर, डॉ. मनोज कुमार प्रजापति, डॉ. दीप नारायण, डॉ. अरुणेश कुमार सहित शोधार्थी व 30 विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।