किसानों की जमीन को अधिग्रहण करने का मामला कोर्ट में अभी लंबित है फिर भी रेलवे द्वारा कार्य शुरू कराने पर रविवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज किसानों ने करहट के पास चल रहे कार्य रोकवाते हुए सड़क जाम कर दिया। इतना ही नहीं रेलवे की सारी मशीनों को भी वापस भेज दिया। मौके पर पहुंची पुलिस क आश्वासन पर लोग माने।
किसानों कहना था कि वर्ष 2009 में कानपुर से मुगलसराय तक के किसानों की जमीन को अधिग्रहण किया गया था। अधिग्रहित की गई जमीन में जगह जगह मालगाड़ी खड़ी करने के लिए यार्ड बनाना था। कहा कि जमीन अधिग्रहण से पहले रेलवे बोर्ड ने उचित मुआवजा व उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया था। लेकिन जमीन लेने के बाद ना किसी को उचित मुआवजा दिया न ही नौकरी दी। जिसको लेकर किसानों में आक्रोश है। बताया कि बगैर अपना वादा पूरा किए रेलवे ने जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। जिसकी जानकारी होने पर किसान भड़क गए और रविवार की सुबह निर्माण कार्य रोकवाने पहुंच गए। कार्य को रोकवाते हुए जेसीबी व पोकलैंड को वहां हटवा दिया। बताया कि 2009 में भूमि अधिगहण के दौरान कुछ लोगों ने मुआवजा लिया था। वहीं कुछ किसानों ने मुआवजा लेने से इंकार कर दिया था। जिन लोगों ने मुआवजा नहीं लिया था वह किसान जमीन की वाजिब कीमत देने की मांग को लेकर कोर्ट में मामला दाखिल किया था। जिसका मुकदमा आज भी न्यायालय में लंबित है। किसानों का कहना है कि अभी केस का फैसला नहीं हुुआ है फिर भी रेलवे ने जबरन कार्य शुरू करा दिया है। जिसको लेकर किसानों में नाराजगी है। फिर भी रेलवे का कोई अधिकारी आज तक किसानों से बात नहीं कर रहा है। किसानो 1000 एकड़ जमीन रलवे ले ली लेकिन मुआवजा आज के रेट से नही दे रहा है। किसानो की बात को कोई जनपतिनिधी नहीं सुन रहा है। इस अवसर बनारसी सिह कमलेश।सिह रतन चौरसिया महेन्दर पटेल कमला देवी वश नरायन सियाराम सुनीता देवी आदि