इसका असर रहा कि निर्वतमान जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल और एसपी अजय कुमार सिंह के प्रयास से एक सिपाही के साथ उसकी बहन किरण और जीजा मुन्नू को एक जनवरी को वाराणसी से बेगमपुरा एक्सप्रेस से भेजा गया। दो दिन रूककर कागजी कार्य पूरा होने के बाद सोमवार की सुबह सभी अमृतसर से घर के लिए निकले और मंगलवार की दोपहर तक वाराणसी पहुंचे। वहां से बस से मिर्जापुर के लिए रवाना हुए।
भाई को खिलाया भूजा और गुड़
पुनवासी को भूजा और गुड़ बहुत पसंद था। किरण उसके लिए भूजा और गुड़ लेकर गई थी। शनिवार को वह भाई को भूजा और गुड़ खिलाकर बचपन की बात बताती रही। पुनवासी ने भी बहन के हाथ का भूजा और गुड़ चाव से खाया।
वतन में भी बेगाने जैसा व्यवहार
पाकिस्तान की जेल में यातनाएं झेल कर वतन लौटे पुनवासी के साथ अपने देश में ही बेगानों और बंदियों जैसा ही व्यवहार हो रहा है। अमृतसर के हेल्थ केयर सेंटर में ठंड के बाद भी उसे जैकेट आदि नहीं दी गई। भाई को लेने पहुंची बहन किरण ने कहा कि हेल्थ केयर सेंटर और जेल में आखिर फर्क क्या है।
रुकने की भी नहीं थी व्यवस्था
भाई को लेने गई बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज के रुकने के लिए वहां के प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। शनिवार को पहुंची बहन को यह चिंता सताने लगी कि आखिर दो दिन कहां रहेगी। उसका टिकट चार जनवरी को है। पुनवासी के परिवार को रेड क्रॉस के सराय में रुकवाया गया। वहां तक ले जाने के लिए साधन उपलब्ध नहीं कराया गया।