मिर्जापुर। जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायतों में स्थित तालाब अब फिल्टर चैंबर के माध्यम से प्रदूषण मुक्त हो सकेंगे। तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत तालाबों में त्रिस्तरीय फिल्टर चैंबर बनाया जाएगा। इससे बरसात का पानी स्वच्छ होकर ही तालाब में जाएगा।
जिले की 809 ग्राम पंचायतों में 1976 तालाब हैं। बरसात का पानी इन तालाबों में संरक्षित होता है, जो पशुओं के पीने के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग किया जाता है। ज्यादातर तालाबों की भौगोलिक स्थिति ऐसी होती है कि उसमें पानी के साथ बहकर गंदगी भी चली आती है। ऐसे में तालाब में कचरे के साथ सिल्ट भर जाती है और उसकी जल संग्रहण क्षमता कम हो जाती है। इससे कम पानी इकट्ठा भी होता है और तालाब जल्द सूख जाते हैं। गर्मी के मौसम में तालाबों के सूखने के कारण उनके निर्माण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता है। इस समस्या के निदान के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत तालाबों में फिल्टर चैंबर बनाने की योजना तैयार की गई है।
तीन स्तर में शोधित होगा पानी
फिल्टर चैंबर बनने से तीन स्तर पर पानी शोधित होने के बाद ही तालाब में जाएगा। पहले स्तर पर एक गड्ढा बनाया जाएगा, जिसमें गिट्टी और रेत डाली जाएगी। पानी इस गड्ढे से होकर जब गुजरेगा, तब उसकी गंदगी उसमें बैठ जाएगी। दूसरे गड्ढे में सिर्फ गिट्टी होगी। उसके बाद तीसरा गड्ढा खाली होगा। उसमें लगभग स्वच्छ पानी होगा, जो वहां से तालाब में जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि इसके लिए सभी ग्राम प्रधानों, सचिवों और कंसलटिंग इंजीनियर को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही तालाबों को मॉडल तालाब के रूप में विकसित किया जाएगा।