मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मंगाई गई सिंगल डोनर मशीन (एसडीपी) एक साल से धूल फांक रही है। एक साल पहले मशीन मंगाई गई थी लेकिन लाइसेंस ही नहीं मिल सका। ऐसे में मशीन का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में बरसात के मौसम में डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए परेशान होना पड़ेगा।
मंडलीय अस्पताल के रक्त केंद्र में पिछले साल जून में 59 लाख से एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) मशीन आई थी। करीब एक साल के बाद भी अस्पताल प्रशासन लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। बरसात के मौसम में डेंगू के मरीज बढ़ेंगे। ऐसे में फिलहाल मशीन का लाभ नहीं मिल पाएगा।
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एसडीपी मशीन के फायदे
किसी को सिर्फ प्लेटलेट्स की जरूरत होती है, तो उसे रक्तदान करना होता है। एक बार रक्तदान करने के बाद तीन महीने तक किसी को खून नहीं दे सकते। वहीं, एसडीपी मशीन से 15 दिन बाद ही डोनर प्लेटलेट्स दान कर सकते है। रक्त से निकलनेे वाले प्लेट्लेट्स को शरीर में चढ़ाने पर पांच से सात हजार प्लेटलेट्स काउंट बढ़ता है। वहीं, एसडीपी चढ़ाने पर 20 से तीन हजार प्लेटलेट्स काउंट बढ़ता है। इससे एक यूनिट में ही मरीज की रिकवरी जल्दी होने लगती है।
केंद्रीय टीम कर चुकी है जांच
मंडलीय अस्पताल के रक्त केंद्र प्रभारी डाॅ. राजन कुमार ने बताया कि पहले लाइसेंस की प्रकिया चल रही है। भारत सरकार की सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन की टीम निरीक्षण भी कर चुकी है। टीम के दोबारा निरीक्षण के बाद जुलाई से एसडीपी मशीन का संचालन शुरू होने की उम्मीद है।