पहाड़ी विकास खंड में तेजी से घट रहे जलस्तर से एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी का संकट पैदा हो गया है। ब्लॉक मुख्यालय के दक्षिणांचल स्थित अधिकांश गांवों में कुएं और तालाब सूख गए हैं। अधिकांश स्थानों पर सार्वजनिक हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं। कहीं हैंडपंप चालू हालत में हैं तो उनसे गंदा पानी निकल रहा है।
जैसे तैसे ग्रामीण तो अपनी प्यास बुझा ले रहे हैं, लेकिन पशु पालक अपने पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। क्षेत्र के पथरहां, सरैया, दूबेपुर, झिंगुरा, टौंगा, मोहनपुर पहाड़ी, भोजपुर, पसैया आदि गांवों में जलापूर्ति के लिए पानी की टंकी व पाइप लाइन बिछाने के लिए डेढ़ से दो करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इतनी अधिक धनराशि खर्च होने के बावजूद पाइप जगह-जगह पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके चलते संबंधित गांवों में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। कमोवेश यही स्थिति ज्यादातर तालाब और पोखरों की है। ज्यादातर तालाबों में पानी की बजाय अप्रैल महीने में धूल उड़ रहे हैं। सिकरी, तोसवां, हिनौती के तालाब में मामूली पानी है। पहाड़ के किनारे बसे जिल्हुलिया, कनिदरी, पचोखरा, थानापुर, मनोहरपुर, खुटहा, सागर सेमर, गहिरा, चेन्दुली, दाढ़ी राम, सुरहुरउआ, विरोहिया , उमरिया अयोध्या प्रसाद, दांती, सूर्यवार, पहाड़ी भोजपुर, सुखनई , महुआरी, शिष्टा, चपगहनआ सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल के लिए ग्रामीण व पशुपालक परेशान हैं। प्रधान थानापुर रामसागर, गहिरा के शिव कुमार भारती, दांती ग्राम पंचायत के जितेंद्र मौर्य, विरोहिया के मुन्ना लाल यादव, दाढ़ी राम के राजेश प्रजापति, महुआरी के जनक दुलारी, पचोखरा के अनिल कुमार सिंह, सुखनई प्रधान मंगला राय, टोंगा प्रधान व्यास जी बिंद, पैहिती के अश्वनी कुमार, सूर्यवार की सोनम देवी, गौराराजा की पार्वती ,गोपालपुर प्रधान त्रिवेणी, प्रधान चपगहन भागवन्ती देवी आदि ने बताया कि तेजी से घटते जल स्तर के चलते ज्यादातर हैंडपंप पानी नहीं दे रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई स्थानों पर सबमर्सिबल पंप लगाए गए हैं, जो कुछ देर चलने के बाद पानी छोड़ दे रहे हैं। खंड विकास अधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर पेयजल के लिए टीम गठित कर दी गई है। जिन गांवों में पानी की जरूरत होगी, वहां टैंकर से पानी की व्यवस्था कराई जाएगी।