जगत जननी आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी के जयघोष से गुंजायमान होता पूरा विंध्यधाम परिसर, माला-फूल, नारियल-चुनरी, रोरी-रक्षा व प्रसाद लिए मंदिर की तरफ बढ़ते श्रद्धालुओं के कदम, घाटों पर स्नान करने के लिए लगा तांता, विंध्य की गलियों में माता के दर्शन करने को लालायित कतार में खड़े आस्थावान, यह नजारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर शनिवार को सुबह से शाम तक विंध्यधाम क्षेत्र में देखने को मिला।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर शनिवार की भोर में मंगला आरती के उपरांत विंध्यधाम में दर्शनार्थियों का रेला उमड़ पड़ा। फूलों से किया गया मां के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर भक्तजन निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा व माता के जयकारे से पूरा धाम परिसर देवीमय हो रहा था। देवीधाम की फूल-पत्तियों सहित रंगीन लाइट, गुब्बारे व चुनरी से की गई सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी।
धाम क्षेत्र के न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी रोड सहित थाना, गली, पक्काघाट गली, जैपुरिया गली, बच्चा पाठक की गली एवं अन्य कई गलियां श्रद्घालुओं से पटी रही। मंदिर के छत पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच साधक पूजा-पाठ में तल्लीन रहे, वहीं अनवरत मुंडन संस्कार भी होते रहे। मंदिर के गुंबद का परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। देवी धाम में पूजन-अर्चन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्त नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा किया।