पहाड़ी-विजयपुर समेत 150 से अधिक गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा, कई जगह एक किलोमीटर दूर से पानी ढो रहे ग्रामीण
मिर्जापुर। भीषण गर्मी के बीच जिले में 1953 करोड़ रुपये की हर घर नल जल योजना लोगों की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही है। पहाड़ी, विजयपुर, सीखड़ और हलिया समेत कई क्षेत्रों में करीब एक लाख से ज्यादा लोग जलसंकट से जूझ रहे हैं। 150 से ज्यादा गांवों के लोग टैंकरों और दूरदराज के जलस्रोतों पर निर्भर हैं।
जिले के सिटी, पहाड़ी, कोन, नारायनपुर, सीखड़, जमालपुर, राजगढ़, पटेहरा, हलिया, लालगंज, छानबे और मझवां ब्लॉकों में वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना शुरू की गई थी। लेकिन 2025 में योजना के पूरी होने के बाद कई गांवों में अब तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। कहीं पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है तो कहीं तकनीकी खामियों के चलते नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। योजना के तहत जिले में 274 पानी टंकियां बनाई गई हैं।
पहाड़ी क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा संकट
पहाड़ी ब्लॉक के दक्षिणांचल क्षेत्र की 16 पंचायतों और भोजपुरी पहाड़ी गांवों की 60 हजार आबादी जल संकट से जूझ रही है। दांती, बिरोहिया, उमरिया अयोध्या प्रसाद, गहिरा, पचोखरा, पैहिंती, बैरहवां और भोजपुरी पहाड़ी समेत कई गांवों में ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं। कई जगह दूषित पानी निकल रहा है। गांवों में बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। घरों में पानी पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही बह कर बर्बाद हो जा रहा है। इस संबंध में बीडीओ पहाड़ी बबिता सिंह ने बताया कि योजना के अधूरे कार्यों की शिकायतें मिली हैं। जिन गांवों में संकट अधिक है, वहां टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।
विजयपुर में 27 हजार लोगों तक नहीं पहुंचा पानी
जिगना। छानबे ब्लॉक मुख्यालय के ग्राम पंचायत विजयपुर में जल जीवन मिशन योजना शुरू होने के बावजूद अब तक नलों से पानी नहीं पहुंच सका है। करीब 27 हजार की आबादी पानी के लिए परेशान है। ग्रामीणों ने बताया कि पुरानी जल निगम की टंकी से 900 परिवारों को कनेक्शन मिला है, लेकिन दिन में केवल 10 मिनट पानी मिलने से जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। महुआडांड़, विजयपुर बाजार, शीतला मंदिर और विजयपुर बस्ती में टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। बीडीओ रामपाल ने बताया कि पेयजल संकट के लिए जरूरत के अनुसार प्रतिदिन टैंकर भेजे जा रहे हैं।
सीखड़ और हलिया : 18 ग्राम सभाओं में पानी टंकी, टैंकर ही सहारा
सीखड़ ब्लॉक की 18 ग्राम सभाओं में पानी टंकियों का निर्माण कराया गया है, लेकिन सोनबरसा समेत कई गांवों में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, हलिया के पठारी क्षेत्र की 15 पंचायतों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। भीटहा, दिघुली, भैसोड़ बलाय पहाड़, नदना, मतवार और बैधा समेत कई गांवों में लोग पेयजल संकट से परेशान हैं। पटेहरा के एडीओ पंचायत धर्मेंद्र दुबे ने बताया कि फिलहाल 50 पंचायतों में 50 टैंकर लगाए गए हैं। जरूरत पड़ने पर संख्या और बढ़ाई जाएगी।
150 गांवों में टैंकरों से हो रही जलापूर्ति
पहाड़ी के दांती, बिरोहिया, उमरिया अयोध्या प्रसाद, गहिरा, शिष्टा, मनोहरपुर, दाढ़ीराम बिरोहिया, पचोखरा, पैहिंती, बैरहवां, कानीदरी, सुखनई, सागरसेमर, थानापुर, सुरवार, सिद्धि, खुटहा, गहिरा गौरा राजा, चेंदुली, गोपालपुर और भोजपुरी पहाड़ी समेत 16 ग्राम पंचायतों एवं मजरों में 150 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। पटेहरा के एडीओ पंचायत धर्मेंद्र दुबे ने बताया कि जहां भी समस्या है, वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पटेहरा में फिलहाल 50 पंचायतों में 50 टैंकर लगाए गए हैं। हलिया ब्लॉक के पठारी इलाके में 15 टैंकरों से 15 ग्राम पंचायतों में पानी की सप्लाई की जा रही है। इनमें भीटहा, दिघुली, भैसोड़ बलाय पहाड़, नदना, मतवार, कुशियरा, थोथा, बैधा और उमरिया आदि शामिल हैं। सभी इलाकों को मिलाकर 150 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है।
गड़गेड़ी में एक साल से 300 परिवारों को नहीं मिल रहा पानी
कोन ब्लॉक क्षेत्र के गड़गेड़ी गांव में पिछले एक साल से 300 परिवारों को पानी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जल निगम से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायत करने के बावजूद विभाग बजट का हवाला देकर मामले को टाल रहा है। पेयजल व्यवस्था को लेकर कुछ दिन पहले अधिकारियों ने गांव का दौरा कर पानी सप्लाई किए जाने का दावा किया था, लेकिन अब तक ग्रामीणों को पानी नहीं मिल सका है। ग्रामीण सुबह-शाम पानी की तलाश में हैंडपंपों की तरफ भटक रहे हैं।
प्रतिक्रिया
पेयजल समस्या के लिए कई बार डीएम सहित जल निगम के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं।
शहीदा बानो, प्रशासक विजयपुर, छानबे।
जल जीवन मिशन के तहत राजकीय पशु चिकित्सालय परिसर में पानी की टंकी बनाई गई है। लगभग 55 प्रतिशत क्षेत्र में पाइप डाली गई है, लेकिन अभी कनेक्शन की शुरुआत नहीं हुई है। पाइपलाइन भी अधूरी है।
वकील शर्मा, विजयपुर, छानबे।
ग्राम पंचायत के ठाकुर, मल्लाह और लोहार बस्ती में पिछले एक साल से जल जीवन मिशन का पानी नहीं पहुंच रहा है। शिकायत करने पर जल निगम के अधिकारी बजट का बहाना बनाकर मामले को टाल देते हैं।
रंजीत कुमार, गड़गेड़ी, कोन।
भोजन बनाने से पहले सुबह और शाम महिलाओं को पानी के इंतजाम के लिए हैंडपंपों की तरफ भटकना पड़ता है। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस है।
मुन्नी देवी, गड़गेड़ी, कोन।
वर्जन
जिले के सभी ब्लॉकों में ओवरहेड टैंक से पानी की सप्लाई की जा रही है। कुछ स्थानों पर ग्राम पंचायत अथवा जिला पंचायत की ओर से सीवर बनाए जाने के दौरान पाइप क्षतिग्रस्त कर दिए गए हैं, इससे समस्या हो रही है। शिकायत मिली है, जल्द समस्या दूर की जाएगी।
राजेश कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण।ती
तीन साल से नीचे जा रहा जलस्तर, क्रिटिकल जोन घोषित
जिले में भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। नगर के 38 वार्डों में 4.50 लाख की आबादी है। वहीं 32 हजार भवन हैं। इनमें से 10 प्रतिशत से अधिक घरों में बोरिंग कराई गई है। नई कॉलोनियों और भवनों में भी लोग लगातार बोरिंग करा रहे हैं। पानी का कारोबार करने वाले भी बेहिसाब दोहन कर रहे हैं। साल दर साल भूजल स्तर नीचे खिसकने से प्रशासन ने नगर क्षेत्र को क्रिटिकल जोन घोषित कर दिया है। नगर में तीन वर्षों से लगातार भूगर्भ जलस्तर घट रहा है।
टेबल
वर्ष जलस्तर
वर्ष 2022 : 11.09 मीटर
वर्ष 2023 : 12.58 मीटर
वर्ष 2024 : 12.76 मीटर
वर्ष 2025 : 13.9 मीटर
स्रोत: भूगर्भ जलस्तर के आंकड़े जल निगम विभाग के मुताबिक
सहायक भू-भौतिकविद स्वप्निल राय ने बताया कि इस वर्ष की प्रक्रिया अभी चल रही है। भूगर्भ जल स्तर की दृष्टि से नगर क्षेत्र सेमी क्रिटिकल स्थिति में पहुंच गया है, जो चिंताजनक है। जिले का कोन विकासखंड एकमात्र ऐसा विकासखंड है, जो अति-दोहित श्रेणी में है।